
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्द ही अपनी आत्मकथा के जरिए अपने जीवन के उन अनुभवों को सामने रखने जा रही हैं, जिन्हें उन्होंने वर्षों तक निजी रखा। ‘Belonging: A Journey of Love’ नाम से आने वाली इस किताब में उनके बचपन से लेकर भारतीय राजनीति तक के सफर का भावनात्मक वर्णन किया गया है।
दर्द और अपनों को खोने का अनुभव बना राजनीति की वजह
सोनिया गांधी ने कहा कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें उन यादों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करना पड़ा, जिन्हें उन्होंने लंबे समय से अपने दिल में संभालकर रखा था।
उन्होंने कहा कि अपनों को खोने का दर्द और जीवन में आए बड़े दुखों ने उन्हें राजनीति की दुनिया में प्रवेश करने के लिए प्रेरित किया। इससे पहले वह अपनी निजी जिंदगी को हमेशा सार्वजनिक जीवन से दूर रखती थीं।
नवंबर में रिलीज होगी 544 पन्नों की किताब
सोनिया गांधी की 544 पन्नों की आत्मकथा को प्रकाशन संस्था अल्फ्रेड ए. नॉफ 10 नवंबर को जारी करेगी।
यह किताब हार्डकवर और ई-बुक संस्करण में उपलब्ध होगी। इसके अलावा इसका ऑडियो संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा। प्रकाशक के अनुसार, किताब की शुरुआती एक लाख प्रतियां छापी जाएंगी।

इटली के बचपन से भारत तक की यात्रा
इस आत्मकथा में सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन से लेकर भारत में उनके लंबे सफर का जिक्र है।
किताब में राजीव गांधी से उनकी मुलाकात, शादी, गांधी परिवार का हिस्सा बनना और भारतीय संस्कृति को अपनाने की कहानी शामिल है।
सोनिया गांधी ने अपनी यात्रा को इटली के छोटे शहर की सरल जिंदगी से लेकर भारत के जटिल राजनीतिक वातावरण तक का सफर बताया है।
राजीव गांधी से पहली मुलाकात का जिक्र
किताब की शुरुआत 1965 में इंग्लैंड के कैंब्रिज से होती है, जहां 19 वर्षीय सोनिया माइनो की मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी।
उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात के बाद दोनों के बीच रिश्ता आगे बढ़ा और बाद में दोनों ने विवाह किया।
आत्मकथा में इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात, भारतीय रीति-रिवाज सीखने, हिंदी बोलने की कोशिश और गांधी परिवार के कठिन दौर का भी उल्लेख किया गया है।
गांधी परिवार के दुख और राजनीतिक सफर
किताब में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी की हत्या जैसे दर्दनाक घटनाक्रमों का भी जिक्र है।
सोनिया गांधी ने बताया कि कई वर्षों तक राजनीति में आने के दबाव को टालने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
इसके अलावा 2004 में कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के फैसले का भी उल्लेख किया गया है।
प्रेम और निष्ठा से जुड़ी जीवन यात्रा
सोनिया गांधी ने कहा कि जब उन्होंने अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा तो उन्हें महसूस हुआ कि उनकी पूरी यात्रा को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह किताब उनके जीवन की खुशियों, संघर्षों और निराशाओं की भावनात्मक यात्रा को समझने का माध्यम बनेगी।
यह आत्मकथा केवल एक राजनीतिक नेता की कहानी नहीं बल्कि एक ऐसी महिला की यात्रा है, जिसने निजी दुखों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सार्वजनिक जीवन के बीच अपना रास्ता बनाया।
