NEET-UG पेपर लीक मामले में SC सख्त, NTA की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि सिर्फ सुरक्षा इंतजामों से परीक्षा प्रणाली मजबूत नहीं बन सकती, इसके लिए स्थायी और भरोसेमंद संस्थागत ढांचे की जरूरत है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।
NTA के ढांचे पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि NTA में कितने महानिदेशक (DG), अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) और वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त हैं।
इसके अलावा अदालत ने सुरक्षित कार्यालय, साइबर सुरक्षा व्यवस्था, गोपनीय इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वतंत्र डेटाबेस और डेटा स्टोरेज सिस्टम को लेकर भी सवाल किए।
कोर्ट ने कहा कि परीक्षा कराने वाली संस्था में स्थायी विशेषज्ञता और अनुभव होना चाहिए, ताकि हर परीक्षा से मिलने वाली सीख का इस्तेमाल भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने में किया जा सके।
प्रश्नपत्र सुरक्षा पर सरकार ने दी जानकारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NTA की प्रश्नपत्र सुरक्षा प्रक्रिया की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी।
उन्होंने बताया कि करीब 500 सवालों के प्रश्न बैंक से चार पेपर तैयार किए जाते हैं। इनमें से दो प्रश्नपत्र DG NTA द्वारा चुने जाते हैं।

प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग CCTV और CISF की निगरानी में होती है। इसके अलावा प्रश्नपत्र ले जाने वाली गाड़ियों को GPS से ट्रैक किया जाता है।
परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी का दावा
सरकार की ओर से बताया गया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर निगरानी रखी जाती है।
दो सेट प्रश्नपत्र स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखे जाते हैं और परीक्षा के दिन DG NTA यह तय करते हैं कि कौन सा पेपर इस्तेमाल किया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाती है।
SC ने कहा- यह सिर्फ सुरक्षा नहीं, सिस्टम की समस्या है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को केवल कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह एक प्रणालीगत समस्या है, जिसे मजबूत संस्थागत व्यवस्था के जरिए हल करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि एक परीक्षा खत्म होने के बाद अगली परीक्षा तक परिस्थितियां बदल जाती हैं, इसलिए लगातार सुधार जरूरी है।
केंद्र सरकार से तीन हफ्ते में मांगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर केंद्र सरकार से तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। अब केंद्र को यह बताना होगा कि परीक्षा व्यवस्था को स्थायी और सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या है राधाकृष्णन समिति?
NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा मंत्रालय ने 2024 में परीक्षा सुधारों के लिए सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था।
इस समिति की अध्यक्षता इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी। समिति ने परीक्षा प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और NTA की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे।
इसके अलावा परीक्षा सुधारों के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में भी एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्य बल बनाया गया है।
NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
