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पंजाब में अचानक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल से मची हलचल प्रशासन ने दिया बड़ा बयान

पंजाब के सभी जिलों में शुक्रवार को ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसे लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को परखना और उसे मजबूत बनाना है। जालंधर के डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने स्पष्ट किया है कि यह ड्रिल पूरे शहर या ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर नहीं होगी, बल्कि केवल सीमित परिसर तक ही सिमित रहेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और इसे केवल एक सुरक्षा अभ्यास के रूप में देखें।

जालंधर में खालसा कॉलेज परिसर में होगा अभ्यास

जालंधर में यह विशेष मॉक ड्रिल खालसा कॉलेज फॉर विमेन परिसर में रात 8 बजे आयोजित की जाएगी। इस दौरान निर्धारित समय पर सायरन बजाए जाएंगे और कुछ समय के लिए ब्लैकआउट किया जाएगा ताकि आपातकालीन स्थिति का वास्तविक अनुभव तैयार किया जा सके। इसके बाद रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन की एक्सरसाइज भी की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया नियंत्रित वातावरण में होगी और केवल परिसर तक ही सीमित रहेगी। प्रशासन का कहना है कि इस अभ्यास का उद्देश्य छात्रों और संबंधित एजेंसियों को वास्तविक संकट के दौरान बेहतर तैयारी प्रदान करना है।

पंजाब में अचानक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल से मची हलचल प्रशासन ने दिया बड़ा बयान

कई एजेंसियां होंगी शामिल, सुरक्षा तंत्र की होगी जांच

इस मॉक ड्रिल में नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स यानी एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस और एनसीसी जैसी कई महत्वपूर्ण एजेंसियां हिस्सा लेंगी। सभी विभाग मिलकर आपसी तालमेल और प्रतिक्रिया क्षमता की जांच करेंगे। इस दौरान यह देखा जाएगा कि किसी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं। यह अभ्यास भविष्य में किसी भी बड़े हादसे या आपदा से निपटने की तैयारी को और मजबूत बनाने में मदद करेगा।

प्रशासन ने अफवाहों से बचने की दी सख्त चेतावनी

डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभ्यास को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही घबराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया केवल एक एहतियाती और जागरूकता अभ्यास है, जिसका वास्तविक आपदा से कोई संबंध नहीं है। प्रशासन ने यह भी कहा कि नागरिकों को इस तरह के अभ्यासों से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि इन्हें समझने और सहयोग करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी भी संकट की स्थिति में बेहतर तैयारी सुनिश्चित की जा सके।

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