
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने भोपाल स्थित रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान करीब 1100 तीर्थयात्रियों को बाबा सोमनाथ के दर्शन के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर की ओर भेजा गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और 21 पवित्र नदियों के जल कलश पूजन से हुई, जिसने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक माहौल से भर दिया।
धार्मिक पर्यटन से बदल रही मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था
सीएम मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन अब केवल आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रहा है। उन्होंने उज्जैन के महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए बताया कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां उज्जैन में सीमित संख्या में पर्यटक आते थे, वहीं अब प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे होटल, ऑटो, दुकानदार और छोटे व्यापारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

देवलोक मॉडल और सांस्कृतिक एकता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक स्थलों को ‘देवलोक’ के रूप में विकसित कर रही है, जिससे क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता भी मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राएं लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति से जोड़ती हैं और यही प्रक्रिया राष्ट्रीय एकात्मता को मजबूत करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चल रही ‘विरासत से विकास’ की नीति का भी उल्लेख किया।
सोमनाथ यात्रा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
सीएम ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश के स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कई आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ मंदिर ने अपनी आस्था और पहचान को बनाए रखा। इस यात्रा के माध्यम से श्रद्धालु न केवल दर्शन करेंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपरा से भी जुड़ेंगे। उन्होंने यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह यात्रा राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक चेतना को और मजबूत करेगी।
