
विजयादशमी के मौके पर RSS को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी ने सियासी बहस तेज कर दी है। बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए महिलाओं के सम्मान और उनकी सशक्त भूमिका का मुद्दा उठाया। वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन ने भी राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी।
विजयादशमी पर स्मृति ईरानी का संदेश
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ज़ुबिन ईरानी ने विजयादशमी को धर्म, आस्था और सत्य की जीत का प्रतीक बताया। उन्होंने लोगों से सत्य के मार्ग पर चलने, अपने स्वधर्म को पहचानने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना बनाए रखने की अपील की। उनके मुताबिक, समाज की रक्षा और उसे बेहतर बनाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है।
राहुल गांधी के बयान पर साधा निशाना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता के महिलाओं के प्रति रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में महिलाओं से ही टिप्पणी मांगने के बजाय संबंधित व्यक्ति के व्यवहार पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
महिलाओं के सम्मान को बनाया मुद्दा
स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के मामले में समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बीजेपी की महिला सदस्यों और RSS की महिला स्वयंसेविकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां किसी एक संगठन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि हर क्षेत्र की महिलाओं को प्रभावित करती हैं।

उन्होंने राहुल गांधी पर सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, यह स्मृति ईरानी की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इस पर कांग्रेस की ओर से पक्ष सामने आने पर बहस का दूसरा पहलू भी स्पष्ट हो सकता है।
राहुल गांधी ने RSS को लेकर क्या कहा?
दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में RSS पर संविधान के खिलाफ होने और महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति मानने वाली सोच रखने का आरोप लगाया था। उनकी यह टिप्पणी संघ के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम के समय सामने आई, जिसके बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव फिर चर्चा में आ गया।
मोहन भागवत के संबोधन में सत्ता परिवर्तन का जिक्र
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव में कहा कि केवल सत्ता या व्यवस्था में बदलाव से मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि स्वार्थ से प्रेरित ताकतें अलग-अलग जगहों पर प्रभाव बनाए रखती हैं और भारत का मजबूत होना उनके हितों के लिए चुनौती बन सकता है। उनके संबोधन में राष्ट्रीय मजबूती और देश के सामने मौजूद चुनौतियों पर जोर दिया गया।
बयानबाजी के बीच महिला सम्मान पर बहस
राहुल गांधी की RSS पर टिप्पणी और स्मृति ईरानी के पलटवार ने राजनीतिक विमर्श को महिला सम्मान, संगठनात्मक विचारधारा और राष्ट्रीय मूल्यों के सवालों से जोड़ दिया है। लोकतंत्र में विचारों पर असहमति स्वाभाविक है, लेकिन ऐसी बहस का महत्व तभी है, जब आरोप-प्रत्यारोप के साथ तथ्यों और मुद्दों पर भी चर्चा हो। आखिरकार, महिलाओं का सम्मान और उनके अधिकार किसी एक राजनीतिक दल या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे समाज का विषय हैं।
