चोरबागान पंडाल हादसा: मुजफ्फरपुर के पिता-पुत्र की मौत, परिवार में मातम

दुर्गा पूजा की भव्यता देखने कोलकाता पहुंचे लोगों के लिए 17 अक्टूबर की रात जिंदगी की सबसे भयावह रात बन गई। चोरबागान पूजा पंडाल में मची भगदड़ ने 19 जिंदगियां छीन लीं। मृतकों में मुजफ्फरपुर के अभिषेक श्रीवास्तव और उनके सात वर्षीय बेटे अयांश भी शामिल थे।
पूजा देखने की चाह बनी आखिरी सफर
मुजफ्फरपुर के रहने वाले 38 वर्षीय अभिषेक कुमार श्रीवास्तव लंबे समय से कोलकाता की दुर्गा पूजा की भव्यता देखना चाहते थे। त्योहार के दौरान पंडाल घूमने निकले अभिषेक अपने सात साल के बेटे अयांश के साथ थे।
किसी ने नहीं सोचा था कि उत्सव देखने निकला यह पिता-पुत्र वापस घर नहीं लौटेगा। हादसे की खबर पहुंचते ही परिवार में खुशियों की जगह मातम छा गया।
19 लोगों की जिंदगी हुई खत्म
चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में कुल 19 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। मृतकों में कोलकाता के अलावा हावड़ा, हुगली, नदिया, पूर्व बर्धमान और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना के लोग भी शामिल थे।
हादसे में अलग-अलग परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया। किसी ने दोस्त खोया तो किसी ने मां, बेटा या जीवनसाथी।
दो सहेलियों की कहानी ने झकझोरा
मृतकों में न्यू टाउन की रहने वाली 17 वर्षीय बरनाली हलदर और उसकी 18 वर्षीय सहेली तानिया बिस्वास भी शामिल थीं। दोनों बचपन से एक-दूसरे की करीबी दोस्त थीं।
बताया गया कि दोनों ने पहले साल्ट लेक के पूजा पंडालों में जाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उन्होंने मध्य और उत्तर कोलकाता जाने का फैसला किया। यही फैसला उनके परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया।

मां-बेटे की जोड़ी भी हादसे का शिकार
इस भगदड़ में पूर्व बर्धमान के 37 वर्षीय टैगर बेज और उनके 14 वर्षीय बेटे संदीप बेज की भी मौत हुई। एक परिवार के दो सदस्यों का एक साथ चले जाना इस हादसे की भयावहता को और बढ़ा देता है।
मृतकों में बारानगर के 59 वर्षीय दिलीप घोष और 46 वर्षीय दीपाली घोष भी शामिल थे। दोनों की मौत से उनके परिवार और परिचितों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।
अलग-अलग जिलों से आए थे लोग
हादसे में हावड़ा के विकास भट्टाचार्य, बल्ली की आकृति कुमारी, हुगली की श्रीपर्णा पोद्दार और पियाली प्रमाणिक, नादिया की आरती सरकार विश्वास तथा उत्तर 24 परगना की कल्पना जाना समेत कई लोगों की जान गई।
इनमें कई लोग परिवार के साथ या दोस्तों के साथ पूजा घूमने निकले थे। त्योहार की भीड़ में अचानक मची भगदड़ ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया।
एक हादसा, कई परिवारों का दर्द
दुर्गा पूजा बंगाल में सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार और समाज के साथ मिलकर त्योहार मनाने की परंपरा भी है। ऐसे में उत्सव के बीच हुई यह त्रासदी कई परिवारों के लिए कभी न भूल पाने वाला दर्द बन गई है।
अभिषेक और अयांश की कहानी इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू सामने लाती है—एक पिता अपने छोटे बेटे के साथ त्योहार की खुशियां देखने निकला था, लेकिन दोनों की जिंदगी वहीं खत्म हो गई। चोरबागान की यह घटना याद दिलाती है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।
