
उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिल गया है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने देहरादून के लोकभवन में पद और गोपनीयता की शपथ लेकर संवैधानिक जिम्मेदारी संभाल ली। राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव के साथ उनका नया कार्यकाल राज्य की सियासत में अहम माना जा रहा है।
लोकभवन में हुआ शपथ ग्रहण समारोह
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली। देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में राज्य के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम की शुरुआत वंदेमातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुई।
मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गज रहे मौजूद
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव आनंद बर्धन और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। शपथ से पहले मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति का अधिपत्र पढ़कर सुनाया। इसके साथ ही बिसेन ने औपचारिक रूप से राज्यपाल का पद संभाल लिया।
गुरमीत सिंह की जगह संभाली जिम्मेदारी
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लिया है। गुरमीत सिंह पांच साल से अधिक समय तक उत्तराखंड के राज्यपाल रहे। अब बिसेन के सामने राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारियां होंगी।

मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव
14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में जन्मे डॉ. बिसेन पेशे से चिकित्सक और कृषक रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े बिसेन को संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव है।
चार बार विधायक, सांसद और मंत्री भी रहे
डॉ. बिसेन 1990 से 2008 के बीच चार बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। इस दौरान उन्होंने वन, परिवहन एवं खनिज, स्कूल शिक्षा और जेल जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वे लोकसभा सांसद भी चुने गए और 2019 में 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
देहरादून पहुंचने पर मिला गार्ड ऑफ ऑनर
राज्यपाल पद संभालने से पहले डॉ. बिसेन रविवार शाम देहरादून पहुंचे थे। जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर राज्य पुलिस ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्धन, डीजीपी दीपम सेठ और जिलाधिकारी आशीष चौहान ने उनका स्वागत किया।
निष्कर्ष
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव अब उत्तराखंड के संवैधानिक दायित्व से जुड़ गया है। चार बार विधायक, मंत्री और सांसद के रूप में लंबी राजनीतिक पारी खेलने के बाद राज्यपाल के रूप में उनकी नई भूमिका पर उत्तराखंड की नजर रहेगी।
