राज्यराजनीति

पूर्वांचल में सियासी दांव—सपा ने सीमा राजभर को दी कमान, ओपी राजभर को घेरने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले रणनीतिक बदलावों का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए महिला सभा की कमान अब सीमा राजभर को सौंप दी है। इस फैसले को सीधे तौर पर ओम प्रकाश राजभर के प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

इस बदलाव की घोषणा पूर्व महिला सभा अध्यक्ष जूही सिंह ने की। पार्टी की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया कि सीमा राजभर, जिन्हें भावना के नाम से भी जाना जाता है, अब महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगी। जूही सिंह 2023 से इस पद पर थीं और पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। अखिलेश यादव ने संकेत दिया है कि उन्हें जल्द ही नई जिम्मेदारी दी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पूर्वांचल की जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश है। सीमा राजभर का संबंध उसी राजभर समुदाय से है, जिस पर ओपी राजभर का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में सपा ने उसी सामाजिक आधार पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है।

दिलचस्प बात यह है कि सीमा राजभर पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से भी जुड़ी रही हैं और कई मौकों पर ओपी राजभर और उनकी पार्टी पर सवाल उठा चुकी हैं। इससे साफ है कि सपा उन्हें एक मजबूत राजनीतिक चेहरा बनाकर पूर्वांचल में नई सियासी जमीन तैयार करना चाहती है।

गौरतलब है कि ओपी राजभर ने 2022 विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन किया था, लेकिन बाद में उन्होंने रास्ते अलग कर लिए और भारतीय जनता पार्टी नीत एनडीए में शामिल हो गए। इसके बाद उन्हें योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया।

राजभर का दावा रहा है कि 2022 में सपा की पूर्वांचल में सफलता उनके साथ आने से संभव हुई थी, हालांकि सपा इस दावे को खारिज करती रही है। पार्टी का कहना है कि अगर उनका प्रभाव इतना मजबूत है, तो 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा क्यों नहीं मिला।

अब सपा की नजर 2027 के चुनाव पर है, जहां वह 2022 और 2024 में मिले समर्थन को बनाए रखना चाहती है। सीमा राजभर को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह साफ संकेत दिया है कि वह पूर्वांचल की राजनीति में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी दांव कितना कारगर साबित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button