राज्यराजनीति

मोहन यादव पर जमीन घोटाले के आरोप, जीतू पटवारी ने पूछे 5 बड़े सवाल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav के परिवार पर 168 एकड़ जमीन खरीदने के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार द्वारा बड़ी मात्रा में जमीन खरीदे जाने के आरोपों पर भाजपा की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री Narendra Modi, भाजपा नेतृत्व और मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल पूछे थे, लेकिन 30 घंटे तक कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन खरीद के सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा इसे ओबीसी राजनीति से जोड़ रही है। पटवारी ने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो रिपोर्ट सार्वजनिक करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और पूरे मामले में पारदर्शिता की जरूरत है। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है तथा जमीन खरीद का मामला इसकी जांच की मांग करता है।

मोहन यादव पर जमीन घोटाले के आरोप, जीतू पटवारी ने पूछे 5 बड़े सवाल

जीतू पटवारी के 5 बड़े सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीतू पटवारी ने भाजपा और मुख्यमंत्री मोहन यादव से पांच सवाल पूछे—

  • क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने जमीन खरीदी है या नहीं?
  • क्या खरीदी गई जमीन का बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में है जहां बाद में सड़क और विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हुईं?
  • क्या सरकार संबंधित परियोजनाओं की पूरी टाइमलाइन सार्वजनिक करेगी?
  • क्या सरकार स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने को तैयार है?
  • क्या मुख्यमंत्री 2023 के बाद परिवार द्वारा खरीदी गई जमीन का श्वेत पत्र जारी करेंगे?

ट्रस्ट को जमीन आवंटन का भी मुद्दा उठाया

जीतू पटवारी ने दावा किया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन एक ट्रस्ट को मात्र एक रुपये में आवंटित की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रस्ट से जुड़े लोगों का संबंध मुख्यमंत्री के करीबी लोगों से है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो सरकार को जांच से परहेज नहीं होना चाहिए।

वहीं, मुख्यमंत्री पक्ष की ओर से पहले यह कहा जा चुका है कि परिवार के सदस्य लंबे समय से रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हैं और अधिकांश जमीनें राजनीतिक पद संभालने से पहले खरीदी गई थीं। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।

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