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बिहार में शराबबंदी के बीच बढ़ा ड्रग्स का खतरा, सूखे नशे की बड़ी बरामदगी ने बढ़ाई चिंता

बिहार में शराबबंदी लागू होने के लगभग एक दशक बाद भी अवैध शराब और नशीले पदार्थों की तस्करी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालिया पुलिस आंकड़े बताते हैं कि गांजा, हेरोइन, अफीम, कोडीनयुक्त कफ सिरप और अन्य नशीले पदार्थों की बरामदगी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, केवल बरामदगी के आंकड़ों से नशे के वास्तविक उपयोग की मात्रा का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पुलिस आंकड़ों में बड़ी बरामदगी

बिहार पुलिस के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच लगभग 21,024.37 किलोग्राम गांजा, 54.048 किलोग्राम चरस, 51.9 किलोग्राम हेरोइन/ब्राउन शुगर/स्मैक, 59.351 किलोग्राम अफीम, 3,45,309 इंजेक्शन, 9,06,907 नशीली टैबलेट और कैप्सूल तथा 2,82,960 कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें जब्त की गईं। इसी अवधि में 89 कथित तस्करों के खिलाफ PIT-NDPS Act के तहत कार्रवाई की गई।

बिहार में शराबबंदी के बीच बढ़ा ड्रग्स का खतरा, सूखे नशे की बड़ी बरामदगी ने बढ़ाई चिंता

2015 से अब तक क्या बदला?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में गांजा, हेरोइन और अफीम की बरामदगी अपेक्षाकृत कम थी। शराबबंदी लागू होने के बाद 2016 और उसके बाद के वर्षों में नशीले पदार्थों की बरामदगी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं 2025 में भी बड़ी मात्रा में गांजा, अफीम, हेरोइन, कोडीनयुक्त कफ सिरप और नशीली गोलियों की बरामदगी हुई थी।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बरामदगी बढ़ने के पीछे दो संभावित कारण हो सकते हैं—तस्करी और उपलब्धता में वृद्धि, या फिर पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई का अधिक प्रभावी होना।

क्यों बढ़ रही है चुनौती?

विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, बिहार की नेपाल के साथ खुली सीमा, पड़ोसी राज्यों से जुड़े तस्करी मार्ग, बेरोजगारी, सामाजिक तनाव और युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति जैसी कई वजहें इस चुनौती को जटिल बनाती हैं। सीमावर्ती जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

युवाओं और स्वास्थ्य पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, नशीले इंजेक्शनों की बड़ी बरामदगी स्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंता बढ़ाती है। बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में एचआईवी संक्रमित लोगों में एक वर्ग ऐसे लोगों का भी है, जिनमें संक्रमण का संबंध नशे के दौरान साझा सिरिंज के इस्तेमाल से जुड़ा पाया गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

सरकार और समाज दोनों के लिए चुनौती

ड्रग्स की तस्करी और नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके समाधान के लिए सख्त कानून लागू करने के साथ-साथ जागरूकता, नशामुक्ति कार्यक्रम और युवाओं के लिए रोजगार एवं परामर्श जैसी पहलें भी जरूरी हैं।

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