
Tamil Nadu में चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। Vijay की पार्टी टीवीके राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं होने की वजह से राज्यपाल Rajendra Vishwanath ने अभी तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है। इसी फैसले को लेकर अब विपक्ष और सहयोगी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का पहला मौका क्यों नहीं दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और अब यह मुद्दा संवैधानिक बहस का रूप लेता जा रहा है। टीवीके समर्थकों का कहना है कि जनादेश का सम्मान होना चाहिए और लोकतंत्र में सबसे बड़ी पार्टी को पहले अपनी संख्या साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं विपक्षी दल इस पूरे मामले को राजनीतिक दबाव और सत्ता संतुलन की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राज्यपाल के फैसले पर उठाए सवाल
Imran Masood ने राज्यपाल के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि संविधान में साफ तौर पर व्यवस्था है कि सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए। अगर वह सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए तब दूसरी पार्टी या गठबंधन को अवसर मिल सकता है। इमरान मसूद ने कहा कि अगर इस प्रक्रिया को नजरअंदाज किया जाता है तो यह लोकतंत्र और संविधान दोनों का अपमान माना जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच किसी तरह का गठबंधन बनाकर सरकार बनाई जाती है तो यह जनता के जनादेश के खिलाफ होगा। कांग्रेस सांसद ने कहा कि राज्यपाल को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर केवल संवैधानिक मर्यादाओं के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है तथा सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।

डीएमके से दूरी और टीवीके को समर्थन पर कांग्रेस की सफाई
तमिलनाडु की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस ने डीएमके से दूरी बनाकर टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया। इस फैसले पर भी राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा हो रही है। इमरान मसूद ने कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी हमेशा सेक्युलर राजनीति और संविधान की रक्षा के साथ खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि जब डीएमके पर कठिन समय आया तब कांग्रेस ने उसका साथ दिया था चाहे वह टूजी मामला हो या कोल स्कैम का विवाद। लेकिन अब पार्टी चाहती है कि राज्य में ऐसी सरकार बने जो नफरत की राजनीति से दूर रहे और संविधान के मूल्यों को मजबूत करे। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता नहीं बल्कि राज्य में स्थिर और धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम आने वाले समय में दक्षिण भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।
बंगाल हिंसा पर भी इमरान मसूद का बड़ा हमला
तमिलनाडु विवाद के बीच इमरान मसूद ने West Bengal के हालात पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने बंगाल चुनाव के बाद हो रही हिंसा को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है वह खुलकर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सत्ता परिवर्तन के बाद भी हिंसा जारी है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि राजनीतिक झंडों के नाम पर हिंसा करने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव इसलिए चाहती है ताकि हिंसा और डर का माहौल खत्म हो लेकिन अगर हालात पहले जैसे ही बने रहें तो फिर सत्ता परिवर्तन का क्या मतलब रह जाता है। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु और बंगाल दोनों मुद्दों पर कांग्रेस अब खुलकर आक्रामक रणनीति अपनाती नजर आ रही है जिससे आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है।
