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आसिम मुनीर ईरान पहुंचे तो क्यों सख्त दिखे रेजाई? परमाणु मुद्दे पर तेहरान ने अमेरिका को दो टूक जवाब दिया

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ईरान यात्रा ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और तेहरान के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध बना हुआ है। मध्यस्थता की कोशिश के बीच ईरान ने परमाणु सामग्री और वार्ता की शर्तों पर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है।

मध्यस्थता के लिए तेहरान पहुंचे मुनीर

आसिम मुनीर 20 अक्टूबर को तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि मुनीर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कोई अंतिम अल्टीमेटम लेकर ईरान पहुंचे थे। उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे पुष्ट तथ्य के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।

रेजाई ने परमाणु सामग्री पर साफ किया रुख

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने मुनीर से मुलाकात के दौरान साफ कहा कि ईरान अपनी समृद्ध परमाणु सामग्री को देश से बाहर नहीं जाने देगा। उन्होंने इसे ईरान की राष्ट्रीय संपत्ति बताया।

रेजाई ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक वाशिंगटन भरोसा कायम करने के लिए ईरान की शर्तों को पूरा करने की दिशा में कदम नहीं उठाता।

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ईरान की सात शर्तों पर अड़ा तेहरान

ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। इनमें युद्ध समाप्त करना, ईरानी फंड जारी करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप रोकना जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं। सभी सात शर्तों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ईरानी संसद अध्यक्ष ग़ालिबाफ ने भी संकेत दिया कि अमेरिकी कदमों के बिना तेहरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन को पहले भरोसा बहाल करने के लिए कदम उठाने होंगे।

अमेरिका का फोकस परमाणु कार्यक्रम पर

अमेरिका की ओर से ईरान के यूरेनियम संवर्धन को कम करने की मांग की जा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा है कि ईरान को अपने संवर्धन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण कमी करनी होगी। दूसरी तरफ तेहरान परमाणु सामग्री को देश से बाहर भेजने से साफ इनकार कर रहा है।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पिकऐक्स माउंटेन स्थल पर संभावित हमले का उल्लेख किया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

मुनीर की यात्रा का क्या निकला नतीजा?

आसिम मुनीर की यात्रा से तत्काल कोई बड़ा समझौता सामने नहीं आया। हालांकि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश जारी है। तेहरान का संदेश फिलहाल स्पष्ट है—पहले अमेरिकी कदम और भरोसा बहाली, उसके बाद ही बातचीत।

ऐसे में मुनीर की यात्रा ने यह जरूर दिखा दिया है कि अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ की भूमिका में बनाए रखना चाहता है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच दूरी अभी काफी गहरी है। आने वाले दिनों में यही देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीति इस गतिरोध को तोड़ पाती है या तनाव और बढ़ता है।

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