
महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) द्वारा श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था पाकिस्तान धार्मिक यात्रा के लिए रवाना किया गया। कुरुक्षेत्र स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी से इस जत्थे को विधिवत अरदास के साथ विदा किया गया। धार्मिक उत्साह और श्रद्धा से भरे इस मौके पर कमेटी के पदाधिकारियों और संगत ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
68 श्रद्धालुओं को मिला वीजा
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झीडा ने बताया कि इस वर्ष 68 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान धार्मिक यात्रा के लिए वीजा प्राप्त हुआ है। जत्था पहले श्री दरबार साहिब, अमृतसर में रात्रि विश्राम करेगा और उसके बाद 21 जून को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करेगा।
ऐतिहासिक गुरुद्वारों में करेंगे दर्शन
धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित कई प्रमुख गुरुद्वारों में माथा टेकेंगे। इनमें गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब, गुरुद्वारा डेरा साहिब और गुरुद्वारा पंजा साहिब प्रमुख हैं। सिख इतिहास और आस्था से जुड़े इन पवित्र स्थलों के दर्शन करना संगत के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है।

30 जून को लौटेगा जत्था
कमेटी के अनुसार यह जत्था पाकिस्तान में विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के बाद 30 जून को वाघा बॉर्डर के रास्ते ही भारत वापस लौटेगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
हेमकुंड साहिब यात्रा पर भी जताई चिंता
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जत्थेदार जगदीश सिंह झीडा ने हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं पर जाने वाली संगत को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
शस्त्र और खालसा पर दिया संदेश
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि शस्त्र खालसा पंथ की पहचान और परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके अनुसार शस्त्र केवल रक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि सिख इतिहास और मर्यादा से भी जुड़े हुए हैं।
