राजनीति

जामिया में भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को हटाने पर विवाद, AISA ने पुलिस पर लगाया मारपीट का आरोप

दिल्ली की Jamia Millia Islamia में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल को लेकर विवाद बढ़ गया है। AISA ने आरोप लगाया है कि शनिवार सुबह पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को जबरन हटाया और इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। हिरासत में लिए गए छात्रों को बाद में रिहा कर दिया गया।

सुबह करीब 5:30 बजे हुई कार्रवाई

AISA के मुताबिक, छात्र पिछले पांच दिनों से छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। संगठन का आरोप है कि शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह करीब 5:30 बजे चीफ प्रॉक्टर असद मलिक के निर्देश पर प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई की।

AISA का दावा है कि कार्रवाई के दौरान कैंपस की लाइटें बंद कर दी गईं और छात्रों को कथित तौर पर घसीटकर बाहर निकाला गया। संगठन ने कई छात्रों के घायल होने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया है।

छात्रों पर निलंबन और निष्कासन का आरोप

AISA का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े कुछ छात्रों के खिलाफ प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। संगठन के अनुसार, कुछ छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित किया गया है, जबकि कुछ को पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए निष्कासित करने की कार्रवाई की गई है।

जामिया में भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को हटाने पर विवाद, AISA ने पुलिस पर लगाया मारपीट का आरोप

छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन को पहले छात्रों से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन संवाद की जगह बल प्रयोग का रास्ता अपनाया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जामिया प्रशासन का इस पूरे मामले पर विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।

AISA ने रखीं चार प्रमुख मांगें

AISA ने मामले को लेकर प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें चीफ प्रॉक्टर असद मलिक के इस्तीफे के साथ छात्रों के निलंबन और निष्कासन के आदेश वापस लेने की मांग शामिल है।

संगठन ने जामिया छात्र संघ को बहाल करने और छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की भी मांग की है। इसके अलावा छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार की स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी है विवाद

AISA का कहना है कि छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। संगठन ने प्रशासन की कार्रवाई को छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।

फिलहाल इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन छात्रों की मांगों और लगाए गए आरोपों पर क्या कदम उठाता है।

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