
पंजाब की राजनीति में 13 अक्टूबर को उस वक्त नई चर्चा शुरू हो गई, जब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के पूर्व ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) मनजीत सिंह सिद्धू कांग्रेस में शामिल हो गए। चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने उनका स्वागत किया। सिद्धू कभी भगवंत मान के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। उनके इस कदम को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक मुकाबले के संदर्भ में देखा जा रहा है।
चंडीगढ़ में कांग्रेस में शामिल हुए मनजीत सिंह सिद्धू
मुख्यमंत्री भगवंत मान के पूर्व OSD मनजीत सिंह सिद्धू ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया।
सिद्धू लंबे समय तक भगवंत मान के करीबियों में रहे हैं। ऐसे में उनका कांग्रेस में शामिल होना पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम को आम आदमी पार्टी के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव का आकलन आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस में आने के बाद क्या बोले मनजीत सिंह सिद्धू?
कांग्रेस में शामिल होने के बाद मनजीत सिंह सिद्धू ने अपने समर्थकों के सहयोग को याद किया। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में लोगों ने उस दौर में भी उनका साथ दिया, जब उनके पास चाय पीने तक के पैसे नहीं होते थे।
सिद्धू ने बताया कि मुश्किल समय में मिले इस समर्थन को वह आज भी याद करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोगों ने उस समय उनके संघर्ष को लेकर मजाक भी किया, लेकिन समर्थकों ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
उनके बयान से यह संकेत मिला कि पार्टी और राजनीतिक सफर से जुड़ा उनका पुराना अनुभव उनके लिए भावनात्मक महत्व रखता है।

‘अपने हाथों से बनाया घर तोड़ना दुख देता है’
मनजीत सिंह सिद्धू ने अपने राजनीतिक सफर की तुलना घर बनाने से की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने हाथों से घर बनाता है, तो उसे छोड़ना या तोड़ना दुख पहुंचाता है, भले ही वह घर समुद्र किनारे रेत से ही क्यों न बनाया गया हो।
इस बयान को उनके पुराने राजनीतिक सफर और उससे जुड़े रिश्तों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने वक्तव्य में कांग्रेस में शामिल होने के पीछे किसी विस्तृत राजनीतिक कारण या आम आदमी पार्टी के खिलाफ किसी खास आरोप का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।
भगवंत मान के करीबी रहे सिद्धू के कदम के क्या मायने?
मनजीत सिंह सिद्धू का भगवंत मान के साथ पुराना जुड़ाव इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। मुख्यमंत्री के पूर्व OSD का विपक्षी पार्टी में शामिल होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाओं को जन्म देता है।
कांग्रेस के लिए यह कदम पंजाब में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने का अवसर हो सकता है। वहीं, आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम अपने पूर्व सहयोगियों और संगठन से जुड़े लोगों के राजनीतिक फैसलों के संदर्भ में चर्चा का विषय बन सकता है।
हालांकि, सिद्धू के पार्टी बदलने से मतदाताओं के रुझान या भविष्य के चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
पंजाब की राजनीति में आगे क्या?
मनजीत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब यह देखना होगा कि उन्हें पार्टी में क्या जिम्मेदारी मिलती है और वह आगे किस तरह सक्रिय भूमिका निभाते हैं। फिलहाल उनके कांग्रेस में प्रवेश और समर्थकों को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है।
यह घटनाक्रम पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके दीर्घकालिक असर का आकलन करने के लिए आने वाले दिनों में पार्टी की गतिविधियों और सिद्धू की भूमिका पर नजर रखनी होगी।
