
भाजपा ने मध्य प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक राम राजा सरकार की नगरी ओरछा में आयोजित करने का निर्णय पिछले महीने लिया था। यह बैठक संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसी मंच से आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन विस्तार की दिशा तय होनी है। ओरछा को लेकर पार्टी विशेष रूप से सांस्कृतिक संदेश भी देना चाहती है।
कार्यसमिति गठन में देरी बनी बड़ी चुनौती
सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब तक प्रदेश कार्यसमिति का गठन ही पूरा नहीं हो पाया है। देरी की प्रमुख वजह निगम और मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया बताई जा रही है। पार्टी का विचार था कि जिन नेताओं को इन पदों में जगह नहीं मिल पाएगी, उन्हें कार्यसमिति में समायोजित किया जाएगा। वहीं, मंत्री दर्जा पाने वाले नेताओं को कार्यसमिति से बाहर रखने पर भी मंथन चल रहा है।

छोटा और संतुलित संगठन बनाने की रणनीति
भाजपा नेतृत्व इस बार बड़ी कार्यसमिति के बजाय छोटी और प्रभावी टीम बनाने के पक्ष में है। लगभग 100 से 125 सदस्यों वाली कार्यसमिति पर विचार किया जा रहा है। लेकिन 62 संगठनात्मक जिलों के आधार पर प्रतिनिधित्व देना अपने आप में चुनौती बन गया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधना भी पार्टी संगठन के लिए एक कठिन कार्य साबित हो रहा है।
ओरछा बैठक से सांस्कृतिक संदेश देने की कोशिश
पार्टी ओरछा को केवल बैठक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के संदेश के रूप में पेश करना चाहती है। अयोध्या के बाद भाजपा अब ओरछा को भी राम संस्कृति के केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। यहां बन रहे श्रीरामराजा लोक कॉरिडोर को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि गर्मी और संगठनात्मक तैयारियों की कमी के कारण मई में बैठक की संभावना कम दिख रही है।
