
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले देहरादून में आयोजित ‘रन फॉर योगा’ कार्यक्रम सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं था, बल्कि स्वस्थ जीवन, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच का संदेश देने वाला जनआंदोलन बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर युवाओं और नागरिकों को योग अपनाने का आह्वान किया।
योग दिवस से पहले जागरूकता का बड़ा अभियान
देहरादून की पुलिस लाइन में आयोजित ‘रन फॉर योगा’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं शामिल होकर योग और फिटनेस के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल दौड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को स्वस्थ और सकारात्मक दिशा देने का प्रयास है। योग को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने में ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
देवभूमि की पहचान है योग और आध्यात्म
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना की भूमि रहा है। ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही यह धरती आज भी दुनिया को संतुलित और स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली वैज्ञानिक पद्धति है। यही कारण है कि इसकी प्रासंगिकता आधुनिक जीवन में पहले से अधिक बढ़ गई है।

प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से मिली वैश्विक पहचान
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को विश्व स्तर पर नई पहचान मिली। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रस्ताव के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। आज दुनिया के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग का अभ्यास कर रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का भी प्रतीक है।
तनाव भरे दौर में योग की बढ़ी अहमियत
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आया है। उन्होंने युवाओं से नियमित योग और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ और अनुशासित युवा ही देश और राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं।
योग और वेलनेस हब बनने की दिशा में उत्तराखंड
धामी ने बताया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद, वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। नई योग नीति के तहत योग केंद्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है, प्रशिक्षकों को सहयोग दिया जा रहा है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
‘रन फॉर योगा’ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। जब समाज का हर वर्ग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएगा, तभी स्वस्थ, नशामुक्त और सशक्त भारत का सपना साकार होगा। उत्तराखंड इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और योग को जनआंदोलन बनाने की राह पर एक मजबूत कदम रख चुका है।
