
उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के छह दिन बीत जाने के बाद भी नए मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है। इस देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार के भीतर निर्णय प्रक्रिया की गति पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी यह स्थिति असमंजस पैदा कर रही है क्योंकि नए मंत्री अभी तक अपने दायित्वों को औपचारिक रूप से संभाल नहीं पाए हैं। इस बीच बीजेपी संगठन के भीतर बड़े बदलाव की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
बीजेपी संगठन में बदलाव की तैयारी तेज
सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई में बड़े स्तर पर फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी 15 मई को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में यूपी बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि संगठन को अधिक मजबूत और चुनावी दृष्टि से प्रभावी बनाने के लिए कई नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है और कुछ पुराने पदाधिकारियों को बदला भी जा सकता है।

संगठन और सरकार के बीच तालमेल पर निगरानी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी चर्चा होगी। दिसंबर 2025 में पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से ही संगठन में कई रणनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं। अब एक बार फिर नई टीम को लेकर मंथन चल रहा है ताकि आने वाले चुनावों में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाया जा सके। विभागों के बंटवारे में देरी ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है।
विपक्ष का हमला और अखिलेश यादव का तंज
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि यूपी में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी अब ऊपर से तय हो रहा है। उन्होंने देरी को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
