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ईरान-सऊदी-UAE एक मंच पर, मोदी-शी-पुतिन मुलाकातों से क्यों खास रहा BRICS सम्मेलन?

दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में वैश्विक राजनीति, आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, व्यापार, वित्तीय सहयोग और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

सम्मेलन के समापन के बाद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS नेताओं के लिए विशेष डिनर की मेजबानी भी की।

तीन दिनों में पीएम मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें

BRICS सम्मेलन के आगाज से एक दिन पहले से लेकर समापन तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब तीन दिनों में 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं।

इन मुलाकातों के जरिए भारत ने अलग-अलग देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की। सम्मेलन के दौरान कई ऐसे देश भी एक मंच पर नजर आए, जिनके बीच क्षेत्रीय तनाव रहा है।

एक मंच पर ईरान, UAE और सऊदी

BRICS सम्मेलन भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती भी था। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान, UAE और सऊदी अरब जैसे देशों की मौजूदगी महत्वपूर्ण रही।

ईरान-सऊदी-UAE एक मंच पर, मोदी-शी-पुतिन मुलाकातों से क्यों खास रहा BRICS सम्मेलन?

भारत ने इन देशों के बीच संवाद और सहयोग की संभावनाओं को बनाए रखने पर जोर दिया। इस लिहाज से BRICS का मंच क्षेत्रीय तनाव के बीच बातचीत के लिए भी अहम साबित हुआ।

‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर बनी सहमति

सम्मेलन में सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, व्यापार और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख जाहिर करते हुए नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया।

घोषणापत्र को भारत की अध्यक्षता में BRICS के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा गया।

पश्चिम एशिया संकट पर चिंता

BRICS देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और तनाव पर चिंता जताई। सदस्य देशों ने अधिकतम संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया।

ईरान से जुड़े संकट के बीच यह रुख BRICS के भीतर अलग-अलग देशों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी माना गया।

एकतरफा प्रतिबंध और टैरिफ का विरोध

BRICS घोषणापत्र में एकतरफा व्यापार और गैर-व्यापार प्रतिबंधों तथा आर्थिक दबावों पर आपत्ति जताई गई। सदस्य देशों ने व्यापार में संरक्षणवादी कदमों के असर पर भी चिंता जाहिर की।

अमेरिका की टैरिफ नीतियों के संदर्भ में BRICS का यह रुख वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर समूह की चिंताओं को सामने लाता है।

आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश

सम्मेलन में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया। आतंकी फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह मिलने को लेकर भी चिंता जताई गई।

BRICS देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही।

पहलगाम हमले का भी जिक्र

भारत की ओर से पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। BRICS के साझा रुख में आतंकवाद की निंदा को महत्व दिया गया।

भारत के लिए यह इसलिए भी अहम था क्योंकि वह लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंचों पर ठोस और एकजुट कार्रवाई की मांग करता रहा है।

मोदी-शी जिनपिंग की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति, व्यापार और आपसी सहयोग समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।

2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के संबंधों को सामान्य दिशा में ले जाने के प्रयासों के लिहाज से यह बैठक महत्वपूर्ण रही।

भारत-चीन रिश्तों को ‘रीसेट’ करने की कोशिश

BRICS के मंच पर भारत और चीन के बीच संवाद ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नई उम्मीदें भी जगाईं। सीमा विवाद के बावजूद आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

भारत का जोर इस बात पर रहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी है।

मोदी-पुतिन की मुलाकात और यूक्रेन मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष, रणनीतिक साझेदारी और व्यापार सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।

BRICS के दौरान रूस-यूक्रेन शांति पहल को लेकर भी चर्चा हुई, जिसने सम्मेलन के कूटनीतिक महत्व को और बढ़ाया।

‘कार डिप्लोमेसी’ भी रही चर्चा में

मोदी और पुतिन की एक साथ कार में सवारी भी सम्मेलन के दौरान चर्चा का विषय बनी। दोनों नेताओं की इस अनौपचारिक मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के मजबूत होने के प्रतीक के तौर पर देखा गया।

कूटनीति में ऐसे प्रतीकात्मक क्षण अक्सर औपचारिक बैठकों से अलग संदेश देते हैं।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर

भारत ने BRICS के मंच से विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक संस्थाओं में मजबूत करने की जरूरत दोहराई।

ग्लोबल साउथ से जुड़े देशों के लिए आर्थिक विकास, वित्तीय संसाधन, तकनीक और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा।

UNSC सुधार और भारत की दावेदारी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी रखता रहा है।

BRICS का मंच इस मांग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहराने के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा।

डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

BRICS के आर्थिक एजेंडे में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच वित्तीय सहयोग को मजबूत करना है।

वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था की चर्चा BRICS के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।

AI और टेक्नोलॉजी पर बढ़ता फोकस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों में सहयोग भी BRICS के भविष्य के एजेंडे का अहम हिस्सा रहा। सदस्य देशों के बीच तकनीकी क्षमता, नवाचार और डिजिटल सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

टेक्नोलॉजी को विकास, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और जलवायु सहयोग

BRICS के आर्थिक एजेंडे में ऊर्जा बदलाव, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ विकास को भी महत्व दिया गया।

विकासशील देशों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता, जलवायु चुनौतियों और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे सीधे आर्थिक विकास से जुड़े हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।

MSME, डिजिटल खेती और युवाओं पर ध्यान

सम्मेलन में छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSME, डिजिटल खेती, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और युवाओं के कौशल विकास जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों पर भी फोकस रहा।

इन मुद्दों के जरिए BRICS को केवल कूटनीतिक मंच के बजाय जमीनी विकास और आर्थिक सहयोग से जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।

2027 में चीन करेगा BRICS की मेजबानी

भारत की अध्यक्षता के बाद अब 2027 में चीन BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसके साथ संगठन के अगले चरण की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर भी रास्ता साफ हो गया है।

अगली अध्यक्षता में भारत द्वारा उठाए गए मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, यह भी देखने वाली बात होगी।

भारत के लिए क्यों खास रहा BRICS 2026?

2026 का BRICS सम्मेलन भारत के लिए केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रहा। आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक व्यापार, डॉलर के विकल्प, संयुक्त राष्ट्र सुधार और ग्लोबल साउथ जैसे मुद्दों पर भारत ने अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं सामने रखीं।

सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को केवल देशों का समूह नहीं, बल्कि समाधान का समूह बताया। उनके मुताबिक, BRICS से दुनिया को उम्मीद है और यह समाधान का एक इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।

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