SIR विवाद के बीच CM योगी का कांग्रेस पर हमला, कहा- संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम पैदा कर रहा है और SIR को लेकर अनावश्यक सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
SIR को लेकर विपक्ष पर CM योगी का हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का रवैया लंबे समय से संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़े करने वाला रहा है। उन्होंने विपक्ष की मौजूदा बयानबाजी को लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए नुकसानदायक बताया।
योगी ने कहा कि SIR कोई पहली बार होने वाली प्रक्रिया नहीं है। उनके मुताबिक, चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया देश में पहले भी अलग-अलग समय पर की जा चुकी है।
हालांकि, विपक्ष की ओर से SIR की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने हाल ही में SIR को लेकर अधिक सार्वजनिक जानकारी और प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी।
1952 से 2003 तक के SIR का दिया उदाहरण
योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा कि SIR पहले भी कई मौकों पर हुआ है। उन्होंने 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में हुई ऐसी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया।
उनका कहना था कि इनमें से कई प्रक्रियाएं ऐसे दौर में हुईं, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारें थीं। इसी आधार पर उन्होंने वर्तमान SIR को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी और अन्य विपक्षी दलों के विरोध पर सवाल उठाया।
निर्वाचन आयोग की मौजूदा जानकारी में भी अलग-अलग राज्यों के लिए पिछली Intensive Revision की qualifying dates दर्ज हैं। आयोग के दस्तावेज के अनुसार उत्तर प्रदेश के लिए पिछली SIR की qualifying date 1 जनवरी 2003 बताई गई है।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया का किया बचाव
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की ओर से SIR को लेकर दी गई जानकारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और जिन मतदाताओं के नाम या फॉर्म से संबंधित दिक्कतें हैं, उनके लिए प्रक्रिया के तहत आवेदन का रास्ता उपलब्ध है।
वर्तमान में निर्वाचन आयोग के SIR-2026 पोर्टल पर मतदाता पिछले SIR की सूची में अपना नाम खोज सकते हैं। नए पात्र मतदाताओं के लिए Form 6 के जरिए पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मतदाता नए पंजीकरण, नाम में सुधार और मतदाता सूची से संबंधित अन्य सेवाओं के लिए ऑनलाइन सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
अपने बयान के दौरान योगी आदित्यनाथ ने SIR के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर बालाकोट एयरस्ट्राइक तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना के शौर्य और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सवाल उठाने से देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ता है। ये टिप्पणियां उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा थीं और इन्हें विपक्ष के प्रति उनके आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
SIR पर विपक्ष की क्या है आपत्ति?
SIR को लेकर विपक्ष की मुख्य आपत्तियां प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची में संभावित नाम कटने और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने 26 सितंबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की थी।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग SIR-2026 के लिए ऑनलाइन पोर्टल, पिछले SIR की मतदाता सूची और Form 6 जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। आयोग ने राज्यों में SIR के संचालन के लिए अपने आदेश और दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
इस तरह SIR को लेकर विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की प्रक्रिया, पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर भी बहस जारी है।
पीएम मोदी से मुलाकात के एक दिन बाद आया बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस मुलाकात की जानकारी आधिकारिक रूप से साझा की थी।
इसके अगले दिन SIR के मुद्दे पर योगी का बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है।
SIR को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विवाद लगातार चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां प्रक्रिया का बचाव करते हुए कांग्रेस और विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहा है। निर्वाचन आयोग की ओर से SIR-2026 के लिए ऑनलाइन सुविधाएं और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आने वाले समय में इस प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम इस बहस को और प्रभावित कर सकते हैं।
