LPU Protest: छात्रों की शिकायत पर FIR दर्ज, CCTV और मोबाइल डेटा खंगाल रही पुलिस

पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में कथित रेप और छात्रा की आत्महत्या के दावों को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शन के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब हॉस्टल की CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्यों और मोबाइल से जुड़े डेटा की जांच कर रही है। हालांकि, मामले में अभी किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है और कथित पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
छात्रों की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
पुलिस के मुताबिक, LPU के गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 से जुड़ी कथित घटना को लेकर छात्रों की ओर से शिकायत दी गई थी। इसी शिकायत के आधार पर कपूरथला जिले के सतनामपुरा थाने में FIR दर्ज की गई।
शिकायत में घटना 23 सितंबर की बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को सुबह 10:17 बजे मामला दर्ज किया गया। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 के तहत केस दर्ज किया गया है।
फिलहाल पुलिस ने किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया है। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
CCTV फुटेज से खुल सकता है घटनाक्रम
छात्रों की शिकायत में हॉस्टल परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की विस्तृत जांच की मांग की गई है। छात्रों का कहना है कि घटना के समय की रिकॉर्डिंग से पूरे घटनाक्रम को समझने और संबंधित लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
पुलिस भी जांच के हिस्से के तौर पर उपलब्ध CCTV फुटेज को खंगाल रही है। इसके साथ ही घटनास्थल से जुड़े संभावित फॉरेंसिक साक्ष्यों को सुरक्षित करने और उनकी जांच की प्रक्रिया भी चल रही है।

हॉस्टल रूम को सील करने की मांग
शिकायत में कथित पीड़िता के हॉस्टल कमरे को सील करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच पूरी होने तक किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के लिए घटनास्थल से जुड़े डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जांच का अहम हिस्सा है।
यूनिवर्सिटी अधिकारियों पर भी लगाए गए आरोप
छात्रों की शिकायत में LPU के कुछ अधिकारियों और हॉस्टल वॉर्डन को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि जांच के दौरान यदि इन आरोपों से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जाए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की जांच में CCTV, मोबाइल डेटा, फॉरेंसिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
महिला SI को सौंपी गई जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी महिला सब-इंस्पेक्टर नवजोत कौर को सौंपी गई है। पुलिस टीम उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने और उनकी जांच करने में लगी है।
इस बीच, पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाली हर जानकारी को तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़े हालात
कथित घटना से जुड़ी खबरें सोशल मीडिया पर फैलने के बाद LPU कैंपस में छात्रों का विरोध तेज हो गया। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे को भी जाम किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जुटे और बाद में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बढ़ाई।
LPU ने दावों को बताया अफवाह
दूसरी ओर, LPU प्रशासन ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कथित रेप और आत्महत्या से जुड़ी खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें और आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी को ही मानें।
यही वजह है कि फिलहाल मामले में दो स्तर की जानकारी सामने आ रही है—एक तरफ छात्रों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज कर रहा है। ऐसे में CCTV, फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के नतीजे इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
LPU मामले में FIR दर्ज होने के बाद जांच का औपचारिक चरण शुरू हो चुका है। पुलिस हॉस्टल की CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्यों और मोबाइल डेटा सहित उपलब्ध अन्य सबूतों की जांच कर रही है। अभी किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है और कथित पीड़िता की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
