
हरियाणा में नगर निगम और नगरपालिका चुनाव इस बार पूरी तरह से स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई में बदल गए हैं। अंबाला, सोनीपत, पंचकूला, सांपला और उकलाना जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चुनावी माहौल में कहीं पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आमने सामने हैं तो कहीं विकास, भ्रष्टाचार और स्थानीय समस्याएं मुख्य मुद्दे बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक कई बड़े नेताओं ने प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिससे यह चुनाव और अधिक हाईप्रोफाइल बन गया है।
सोनीपत और पंचकूला में विकास बनाम भ्रष्टाचार की सीधी टक्कर
सोनीपत नगर निगम चुनाव में भाजपा अपने ट्रिपल इंजन सरकार के विकास मॉडल को प्रमुख मुद्दा बनाकर जनता के बीच जा रही है, जबकि कांग्रेस नगर निगम में भ्रष्टाचार, प्रॉपर्टी आईडी विवाद और शहर की बदहाल व्यवस्था को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। यहां दोनों दलों के बड़े नेताओं ने प्रचार में हिस्सा लिया है जिससे मुकाबला और तीखा हो गया है। वहीं पंचकूला में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और नेता मैदान में उतरे हैं, जबकि कांग्रेस ने संगठनात्मक ताकत और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी लड़ाई लड़ी है। यहां निर्दलीय और अन्य दलों की मौजूदगी भी समीकरणों को प्रभावित कर रही है।

सांपला में हुड्डा के गढ़ पर भाजपा की राजनीतिक परीक्षा
रोहतक जिले की सांपला नगरपालिका इस बार केवल एक स्थानीय निकाय चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी परीक्षा बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। संगठन से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक ने प्रचार में सक्रिय भागीदारी निभाई है। भाजपा इस चुनाव को हुड्डा के गढ़ में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित खेमे और निर्दलीय प्रत्याशी भी पूरी ताकत से मैदान में हैं। रोड शो, जनसंपर्क और नुक्कड़ सभाओं ने चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है और अब 15 हजार से अधिक मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
उकलाना में कांग्रेस गढ़ पर भाजपा की कड़ी चुनौती, मुकाबला त्रिकोणीय
हिसार जिले की उकलाना नगरपालिका चुनाव इस बार भाजपा के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है। यह क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है और यहां वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का मजबूत प्रभाव है। भाजपा ने पहली बार अपने प्रत्याशी को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतारा है, जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री भी प्रचार में शामिल हुए। वहीं कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशी को भी विभिन्न दलों का समर्थन मिलने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। चुनावी माहौल में हर पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही है, लेकिन अंतिम फैसला अब मतदाता करेंगे।
