सुप्रीम कोर्ट के 5 निर्देश, केंद्र, दिल्ली पुलिस, DMRC और रेलवे को कारण बताओ नोटिस

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, इंटरनेट की निर्बाध उपलब्धता तथा बैरिकेडिंग की समीक्षा करने को कहा। साथ ही, संबंधित अधिकारियों से कथित अवमानना के मामले में जवाब मांगा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये पांच निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिकों के अधिकारों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए।
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मेट्रो और रेल सेवाएं: सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में जरूरी प्रतिबंधों को छोड़कर सेवाएं सामान्य रूप से चलाने के निर्देश दिए।
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आवाजाही की स्वतंत्रता: ट्रैफिक नियमों के अधीन शहर में लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा।
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बैरिकेडिंग की समीक्षा: कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड लगाने की जरूरत की तत्काल समीक्षा करने का निर्देश दिया।
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इंटरनेट सेवाएं: कानून के अनुरूप इंटरनेट कनेक्टिविटी निर्बाध रखने को कहा।
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हिरासत पर निर्देश: कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी को हिरासत में नहीं लेने और जहां धारा 163 लागू नहीं है, वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मनमानी कार्रवाई से बचने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट के आसपास लगे बोर्ड हटाने का निर्देश
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 लागू होने से संबंधित बोर्ड हटाने का भी निर्देश दिया, यदि वे अब तक लगे हुए हों। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लोगों और वकीलों को अदालत तक पहुंचने में परेशानी न हो और न्याय पाने को लेकर कोई आशंका न रहे।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने मौलिक अधिकारों की रक्षा की अदालत की जिम्मेदारी पर जोर दिया। वकीलों ने प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट, हिरासत और पुलिस बल के इस्तेमाल के मुद्दे उठाए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि अवमानना साबित हो गई है; मामले में आगे की सुनवाई और जवाब महत्वपूर्ण होंगे
अब अधिकारियों के जवाब पर नजर
CJP प्रदर्शन को लेकर हुई सुनवाई ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने के बीच संतुलन का सवाल फिर सामने रखा है। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, DMRC और रेलवे की ओर से दिए जाने वाले जवाब और अदालत के आगामी निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
