वैश्विक तनाव और अमेरिकी नीति के बीच सोने और चांदी की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच वायदा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 2 अप्रैल 2026 की डिलीवरी के लिए सोने का भाव बीते सत्र के मुकाबले 6,472 रुपये घटकर 1,47,078 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इसी समय, 5 मई 2026 की डिलीवरी अनुबंध के लिए चांदी की कीमत में 17,251 रुपये की गिरावट देखी गई। इस गिरावट के चलते निवेशकों में बेचैनी और भविष्य की योजना को लेकर असमंजस का माहौल बन गया है।
महानगरों में सोने का हाजिर भाव और खरीदारी के रुझान
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमत में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹15,206 प्रति ग्राम, 22 कैरेट ₹13,940 प्रति ग्राम और 18 कैरेट ₹11,408 प्रति ग्राम रही। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹15,191 प्रति ग्राम रही, जबकि चेन्नई में यह ₹15,600 प्रति ग्राम रही। बैंगलोर में भी 24 कैरेट सोने का भाव ₹15,191 प्रति ग्राम रहा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि महानगरों में निवेशक अभी भी सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं, लेकिन कीमतों में गिरावट ने खरीदारी के निर्णय को प्रभावित किया है।

ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार सातवें सत्र गिरावट
ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत गुरुवार को लगभग 4,710 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जो पिछले छह हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त (हॉकिश) रुख मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने बिना ब्याज वाली इस धातु की आकर्षण क्षमता को कम कर दिया। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान तथा इजरायल के बीच भू-राजनीतिक तनाव ने सोने की कीमतों पर दबाव डाला है। आमतौर पर ऐसे समय में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार निवेशक मार्जिन कॉल्स और ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण सतर्क दिख रहे हैं।
साल 2026 में सोने की बढ़त और भविष्य की स्थिति
साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोने ने लगभग 12 प्रतिशत की बढ़त बनाई है। हालांकि, हाल की गिरावट और ब्याज दरों में कटौती की कम उम्मीदों ने इसकी तेजी को धीमा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को सोने में निवेश करते समय भू-राजनीतिक हालात, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और घरेलू मांग का ध्यान रखना होगा। यदि वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल बना रहता है, तो सोने की कीमतों में अस्थिरता जारी रह सकती है।
