जनगणना 2027 की तैयारियां तेज, सरकार ने डिजिटल डेटा कलेक्शन की नई व्यवस्था लागू की

भारत में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां अब तेज हो चुकी हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि जनगणना की प्रक्रिया अब उन्नत चरण में पहुंच गई है और जल्द ही कई राज्यों में पहले चरण—हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना—का फील्डवर्क शुरू होने वाला है। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिससे डेटा संग्रह और प्रोसेसिंग अधिक सटीक और पारदर्शी होगी।
दो चरणों में होगी जनगणना, जाति गणना भी शामिल
जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग गणना होगी, जो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना के साथ जाति आधारित आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे। यह स्वतंत्रता के बाद भारत की आठवीं जनगणना होगी, जो 2011 के बाद आयोजित की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और राज्य प्रशासन के सहयोग से जमीनी स्तर पर कार्य संपन्न कराया जाएगा।

डिजिटल और सेल्फ इन्यूमरेशन पर रहेगा फोकस
इस बार जनगणना में एक बड़ी तकनीकी पहल भी की गई है, जिसमें लोग स्व-गणना (Self Enumeration) के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए विशेष पोर्टल और ऐप विकसित किए गए हैं, जो कई भाषाओं में उपलब्ध होंगे। जनगणना ऐप 16 भाषाओं में और मैन्युअल दस्तावेज 19 भाषाओं में तैयार किए गए हैं ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग आसानी से भाग ले सकें। सरकार ने इस कार्य के लिए 11000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी स्वीकृत की है।
जनगणना में पूछे जाएंगे 34 सवाल, गोपनीय रहेगा डेटा
पहले चरण में लोगों से कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें घर की संरचना, उपयोग में आने वाली सामग्री, परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया की जानकारी, उपयोग किए जाने वाले संसाधन और वाहनों से संबंधित प्रश्न शामिल होंगे। इसके अलावा लिव-इन संबंधों को भी जनगणना में वैवाहिक दंपत्ति के रूप में माना जाएगा, यदि वे स्वयं को स्थायी साथी मानते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना पूरी तरह गोपनीय होगी और इसकी जानकारी RTI के तहत सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय के निर्देशन में राज्य सरकारों के सहयोग से पूरी की जाएगी, और अधिकारियों का कहना है कि यह देश की सबसे व्यापक और महत्वपूर्ण सांख्यिकीय कवायदों में से एक होगी।
