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Moody Ratings Report: भारत पर ट्रंप का 25% टैरिफ, मूडीज बोला- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा खतरा

Moody Ratings Report: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ ने भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज़ (Moody’s) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में आगाह किया है कि रूस से सस्ता तेल लगातार खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए इस दंडात्मक टैरिफ का सीधा असर देश की मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा। मूडीज़ के अनुसार, यह कदम भारत की ‘मेक इन इंडिया’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की गति को धीमा कर सकता है, खासकर जब यह पहल वैश्विक विनिर्माण में भारत की भागीदारी को बढ़ाने के लिए बनाई गई है।

7 अगस्त से लागू, 28 अगस्त को दूसरा झटका

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने 31 जुलाई को भारतीय वस्तुओं पर 25% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जिसे 7 अगस्त से लागू कर दिया गया है। इसके बाद, 6 अगस्त को ट्रंप ने एक और अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क की घोषणा की, जो 28 अगस्त से प्रभावी होगा। यह निर्णय रूस से सस्ते तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना अब भी बनी हुई है, लेकिन जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, भारत की निर्यात और उत्पादन नीति पर इसका प्रभाव निश्चित माना जा रहा है।

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‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को झटका

मूडीज़ की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम, जिसे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, इस टैरिफ की वजह से धीमी पड़ सकती है। विशेष रूप से हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर — जिसमें मोबाइल, लैपटॉप, चिप्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आते हैं — पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। भारत सरकार ने 2020 के बाद से कई सेक्टर्स को PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के तहत प्रोत्साहन देना शुरू किया था, जिसके अच्छे परिणाम देखने को मिले थे। लेकिन अब अगर अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की कीमत टैरिफ के कारण बढ़ेगी, तो प्रतिस्पर्धा में भारत पिछड़ सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और भविष्य की चुनौती

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार $131.8 बिलियन तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि अमेरिका भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। भारत ने अमेरिका को लगभग $86.5 बिलियन का निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाएं और मशीनरी शामिल हैं। ये सभी वही क्षेत्र हैं जिन्हें भारत सरकार की PLI योजना के तहत छूट और प्रोत्साहन दिया गया है। ऐसे में इन पर टैरिफ लगना न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी को भी सीमित कर सकता है। यदि अमेरिका और भारत के बीच बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला, तो यह भारत के लिए वैश्विक विनिर्माण हब बनने की राह में एक बड़ा रोड़ा साबित हो सकता है।

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