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गोबर से ऊर्जा क्रांति: मिडिल ईस्ट संकट के बीच अरुणाचल का बायोगैस मॉडल बना मिसाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और एलपीजी सप्लाई में अनिश्चितता के बीच भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश ने एक अनोखी पहल के जरिए आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है। ईटानगर के पास निर्जुली स्थित सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म (CCBF) में स्थापित बायोगैस प्लांट अब स्थानीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा का मजबूत स्रोत बनकर उभरा है।

इस प्रोजेक्ट के तहत 2×15 क्यूबिक मीटर क्षमता वाला बायोगैस प्लांट लगाया गया है, जो रोजाना लगभग 150 मवेशियों से निकलने वाले 5-6 क्विंटल गोबर का उपयोग करता है। पहले यही गोबर खाद के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इसे प्रोसेस कर बायोगैस में बदला जा रहा है, जिससे खाना पकाने और रोशनी जैसी जरूरतें पूरी की जा रही हैं।

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि फार्म परिसर में रहने वाले करीब 12 परिवारों की एलपीजी पर निर्भरता काफी हद तक कम हो गई है। यह मॉडल ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

राज्य के पशुपालन, पशुचिकित्सा और डेयरी विकास विभाग के निर्देश पर शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा किया गया। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ ऊर्जा उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि एक समग्र समाधान है, जो अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती को भी बढ़ावा देता है।

बायोगैस प्लांट से निकलने वाला स्लरी (घोल) खेतों के लिए अत्यंत उपयोगी जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इस तरह यह पहल किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है।

राज्य सरकार अब इस मॉडल को और विस्तार देने की योजना बना रही है। विभिन्न सरकारी फार्मों में ऐसे ही बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

यह पहल यह भी दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय समाधान कैसे बड़े संकट का मुकाबला कर सकते हैं। गोबर जैसे सामान्य अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलकर अरुणाचल प्रदेश ने न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया है।

कुल मिलाकर, यह बायोगैस मॉडल भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो बताता है कि सही सोच और तकनीक के जरिए हर संकट का समाधान निकाला जा सकता है।

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