4,447 करोड़ का प्रोजेक्ट, 1,400 रैयत और सिर्फ 35 को मुआवजा, मोकामा-मुंगेर फोरलेन में क्यों फंसा पेंच?

बिहार में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना से सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की धीमी प्रक्रिया ने काम की राह मुश्किल कर दी है। मुंगेर में करीब 1,400 रैयतों में से अब तक सिर्फ 35 को मुआवजा मिला है। बाढ़, दस्तावेजों के सत्यापन और अमीनों की हड़ताल ने भी चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
4,447 करोड़ की परियोजना, चार जिलों से गुजरेगी सड़क
बिहार की मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना 4,447 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जानी है। इसकी कुल लंबाई 82.2 किलोमीटर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परियोजना के लिए 23 मार्च 2026 को मेसर्स जीआर इंफ्रा का चयन किया था।
प्रस्तावित सड़क पटना, लखीसराय, मुंगेर और शेखपुरा जिलों से होकर गुजरेगी। इसमें लखीसराय में 54.1 किलोमीटर, मुंगेर में 17.2 किलोमीटर, पटना में 8.5 किलोमीटर और शेखपुरा में 2.6 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना है।
हालांकि, निर्माण एजेंसी का चयन होने के बावजूद जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इससे निर्माण कार्य के लिए जमीन उपलब्ध कराने की तैयारी प्रभावित हो रही है।
मुंगेर में 542 करोड़ का आवंटन, मुआवजा सिर्फ 11.75 करोड़
मुंगेर जिले में परियोजना के लिए करीब 1,400 रैयतों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इसके लिए जिला भू-अर्जन कार्यालय को लगभग 542 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक सिर्फ 35 रैयतों को 11.75 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है। यानी प्रभावित भूस्वामियों के बड़े हिस्से को अभी भुगतान का इंतजार है।
मुआवजा वितरण की धीमी रफ्तार से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाई हो रही है। जब तक जमीन से जुड़े दावों का सत्यापन और भुगतान नहीं होता, तब तक निर्माण एजेंसी को संबंधित जमीन का कब्जा सौंपना भी चुनौती बना रह सकता है।
सफियासराय में 300 मकान और दुकानों पर संकट
मुंगेर के सफियासराय इलाके में प्रस्तावित फोरलेन के एलायमेंट की जद में करीब 300 पक्के-कच्चे मकान, दुकानें और चारदीवारियां आने की जानकारी दी गई है। परियोजना के लिए इन्हें हटाने की जरूरत पड़ सकती है।
इससे स्थानीय परिवारों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। लोगों के सामने अपने घर और दुकान खोने की आशंका है। प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की राशि, भुगतान की समयसीमा और पुनर्वास से जुड़े सवाल अहम हैं।
ऐसी स्थिति में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी रखना और प्रभावित लोगों को समय पर जानकारी देना जरूरी है, ताकि मुआवजे और निर्माण को लेकर अनिश्चितता कम हो सके।

बाढ़ और अमीनों की हड़ताल से जमीन की मापी प्रभावित
परियोजना की राह में प्राकृतिक परिस्थितियां और प्रशासनिक चुनौतियां भी बाधा बन रही हैं। सफियासराय, इंद्रुख और चौरदीगर में प्रशासन ने विशेष शिविर लगाकर रैयतों से जमीन के दस्तावेज, एलपीसी और दावों से जुड़े कागजात जमा करने की अपील की थी।
हालांकि, जानकारी की कमी और अविश्वास के कारण कई रैयत शिविरों तक नहीं पहुंचे। दूसरी ओर, दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी जमा होने से जमीन की मापी प्रभावित हुई।
इसके अलावा, 6 अक्टूबर से अमीनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जमीन की नापी और भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (एलपीसी) के सत्यापन का काम भी प्रभावित होने की बात कही गई है।
प्रशासन का दावा, जल्द तेज होगी मुआवजा प्रक्रिया
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पंकज गुप्ता के मुताबिक, जलभराव और अमीनों की हड़ताल से तकनीकी दिक्कतें आई हैं। उन्होंने बताया कि पानी उतरने के साथ रैयतवार अधिसूचना जारी करने और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि मुआवजा वितरण में तेजी लाकर जमीन का भौतिक कब्जा निर्माण एजेंसी को सौंपने की दिशा में काम किया जाएगा। हालांकि, प्रभावित लोगों को भुगतान कब तक मिलेगा और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी, यह स्पष्ट होना बाकी है।
मोकामा-मुंगेर फोरलेन का भविष्य अब किन बातों पर निर्भर?
इस परियोजना की प्रगति जमीन की मापी, दस्तावेजों के सत्यापन, मुआवजा भुगतान और प्रभावित लोगों की आपत्तियों के निस्तारण पर निर्भर करेगी। अमीनों की हड़ताल समाप्त होने और जलभराव कम होने के बाद प्रशासन को लंबित काम पूरा करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष: 4,447 करोड़ रुपये की मोकामा-मुंगेर फोरलेन परियोजना बिहार के सड़क ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलहाल जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन कितनी जल्दी रैयतों को भुगतान करता है और निर्माण एजेंसी को जमीन सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
