गणतंत्र दिवस परेड की सबसे बेस्ट झांकी कौन सी और सेलेक्शन कैसे होता है?

गणतंत्र दिवस परेड भारत की एकता, सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी प्रगति का भव्य प्रदर्शन होती है। इस परेड में देश के विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां मुख्य आकर्षण होती हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि इतनी झांकियों में से कुछ को ही क्यों मौका मिलता है और उनका चयन कैसे होता है?
झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय की देखरेख में एक उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी करती है। इस कमेटी में कला, संस्कृति, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं जो राज्यों और विभागों के प्रस्तावित डिजाइनों का मूल्यांकन करते हैं। हर साल करीब 50-60 प्रस्तावों में से केवल 17 राज्य और 12-15 मंत्रालयों की झांकियां परेड में जगह पाती हैं क्योंकि समय और जगह सीमित होती है।
सेलेक्शन की प्रक्रिया कई चरणों में होती है। शुरुआत में सितंबर-अक्टूबर में राज्य और विभाग अपने कन्सेप्ट नोट और स्केच भेजते हैं। फिर स्क्रीनिंग कमेटी प्रासंगिकता, थीम, तकनीकी योग्यता के आधार पर 30-35 प्रस्ताव चुनती है। अगले चरण में चयनित प्रस्तावों के 3D मॉडल पेश किए जाते हैं और आवश्यक सुधार सुझाव दिए जाते हैं। अंततः अंतिम सूची जारी होती है, जिसमें रिहर्सल और फाइनल अप्रूवल भी शामिल होता है।
झांकियों का निर्माण कलाकारों, इंजीनियरों और डिजाइनरों की टीम करती है, जिसमें ट्रेलर, पेंटिंग, मूर्तियां, मैकेनिकल हिस्से, लाइटिंग और साउंड शामिल होते हैं। निर्माण में 45-60 दिन लगते हैं।
झांकियों के लिए कुछ नियम भी तय हैं जैसे धार्मिक या राजनीतिक प्रचार प्रतिबंधित है, जीवित नेताओं की तस्वीर नहीं लगाई जा सकती, और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग जरूरी है।
सर्वश्रेष्ठ झांकी का चयन विषय की प्रासंगिकता, रचनात्मकता, तकनीकी उत्कृष्टता, प्रस्तुति और मौलिकता के आधार पर किया जाता है। विजेता झांकियां राज्य, मंत्रालय और विशेष श्रेणियों में सम्मानित होती हैं।
इस प्रकार, गणतंत्र दिवस की झांकियां भारत की विविध संस्कृति और प्रगति का प्रतीक होती हैं, जो कई चरणों की कड़ी मेहनत और तकनीकी मूल्यांकन के बाद चुनी जाती हैं।
