टेक्नॉलॉजी

SIM बदलने या eSIM ट्रांसफर के बाद क्यों लगती है 24 घंटे की रोक

अक्सर लोग नया SIM लेते समय या eSIM पर शिफ्ट होने के बाद नेटवर्क या एक्टिवेशन टाइम को सबसे बड़ी परेशानी मानते हैं। लेकिन असल में समस्या कई सेवाओं पर लगने वाली अस्थायी रोक होती है। यह रोक आमतौर पर 24 घंटे के लिए लगाई जाती है और इसका उद्देश्य ऑनलाइन फ्रॉड को रोकना होता है। भारत में टेलीकॉम नियमों के तहत Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने कुछ सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इन नियमों के मुताबिक SIM बदलने या eSIM ट्रांसफर के बाद कुछ सेवाएं थोड़े समय के लिए बंद कर दी जाती हैं ताकि कोई व्यक्ति आपके नंबर का गलत इस्तेमाल न कर सके।

SMS और डिजिटल पेमेंट सेवाओं पर प्रभाव

SIM बदलने के तुरंत बाद टेलीकॉम कंपनियां करीब 24 घंटे के लिए SMS सेवाओं को रोक देती हैं। इस दौरान न तो संदेश भेजे जा सकते हैं और न ही प्राप्त किए जा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा असर बैंक और डिजिटल पेमेंट सेवाओं पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, बैंक से आने वाले OTP या पेमेंट नोटिफिकेशन कुछ समय के लिए नहीं मिलते। क्योंकि अधिकतर बैंकिंग सिस्टम SMS आधारित वेरिफिकेशन पर निर्भर करते हैं, इसलिए इस अवधि में कई सेवाएं अस्थायी रूप से काम नहीं करतीं। 24 घंटे पूरे होने के बाद SMS सेवा अपने आप सामान्य हो जाती है।

SIM बदलने या eSIM ट्रांसफर के बाद क्यों लगती है 24 घंटे की रोक

UPI ऐप्स और बैंकिंग ट्रांजैक्शन में दिक्कत

UPI ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe और Paytm SMS वेरिफिकेशन पर निर्भर करते हैं। SIM बदलने के तुरंत बाद इन ऐप्स को इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है। जब SMS सेवा बंद होती है तो ऐप लॉग-इन या एक्टिवेट नहीं हो पाता। 24 घंटे की रोक खत्म होने के बाद यूजर को ऐप दोबारा खोलकर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है, इसके बाद सेवाएं फिर से सामान्य रूप से काम करने लगती हैं। इसके अलावा बैंकिंग ट्रांजैक्शन और OTP पर भी असर पड़ सकता है। इस दौरान कार्ड पेमेंट, फंड ट्रांसफर या इंटरनेट बैंकिंग लॉग-इन के लिए OTP प्राप्त नहीं होता।

SIM Swap Fraud से सुरक्षा और नंबर बदलने की प्रक्रिया

SIM बदलने के बाद SMS सेवा को अस्थायी रूप से बंद करने का मुख्य कारण SIM Swap Fraud को रोकना है। ठग किसी व्यक्ति के नंबर का डुप्लीकेट SIM निकलवा कर OTP के जरिए बैंक खातों तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। 24 घंटे की यह रोक धोखेबाजों को रोकती है और असली यूजर को समय देती है कि अगर नंबर के साथ कोई संदिग्ध गतिविधि हुई तो वह तुरंत टेलीकॉम कंपनी या बैंक को सूचित कर सके। अगर मोबाइल नंबर बदल दिया गया हो तो पहले बैंक में नया नंबर अपडेट कराना होता है और UPI ID को भी नए नंबर से दोबारा रजिस्टर करना पड़ता है।

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