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ICC T20 World Cup 2026 में टीम इंडिया की ऑफ स्पिन कमजोरियों ने चिंता बढ़ाई

ICC T20 World Cup 2026 में टीम इंडिया ने अब तक बेहतरीन खेल दिखाया है। सूर्याकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने ग्रुप स्टेज के चारों मैच जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। पाकिस्तान पर बड़ी जीत भी इस लय का हिस्सा रही। हालांकि 4-0 का रिकॉर्ड टीम की कमजोरी पूरी तरह नहीं छिपा पा रहा है। खासतौर पर ऑफ स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का संघर्ष बार-बार सामने आया।

ग्रुप स्टेज में बल्लेबाजी की चुनौतियां

USA के खिलाफ पहले मैच में भारत का पावरप्ले असफल रहा और टीम के चार बल्लेबाज महज 46 रन पर आउट हो गए। नामीबिया के खिलाफ मध्य ओवर्स में रन गति थम गई। सूर्या और तिलक वर्मा की साझेदारी ने टीम को संभाला, लेकिन उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई। पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन की तेज 77 रनों की पारी के बावजूद बीच के ओवर्स में रन गति धीमी रही। नीदरलैंड्स के खिलाफ भी मध्य ओवर्स में तीन विकेट गिरकर भारत की पारी प्रभावित हुई।

ICC T20 World Cup 2026 में टीम इंडिया की ऑफ स्पिन कमजोरियों ने चिंता बढ़ाई

स्पिनर्स के खिलाफ उजागर हुई कमजोरियां

ग्रुप स्टेज के सभी चार मैचों में भारतीय बल्लेबाज स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे। अमेरिका के मोहम्मद मोहसिन और हरमीत सिंह, नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरासमस और पाकिस्तान के सैम अयूब ने भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। नीदरलैंड्स के बास डे लीडे ने भी स्पिन गेंदबाजी पर फोकस किया और मध्य ओवर्स में रन गति को नियंत्रित रखा। इस वजह से ऑफ स्पिन के खिलाफ भारत का स्ट्राइक-रेट कमजोर नजर आया और सूर्या–तिलक का लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन भी असरदार नहीं रहा।

सुपर-8 में चुनौती और उम्मीदें

सुपर-8 में भारत की टक्कर साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे से होगी। 22 फरवरी को अहमदाबाद में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला मुकाबला टीम के लिए बड़ी परीक्षा साबित होगा। विपक्षी टीमों की रणनीति पावरप्ले के बाद रफ्तार कम करने और ऑफ स्पिन से दबाव बनाने की होगी। ग्रुप स्टेज में उजागर हुई कमजोरियों को सुधारना अब टीम इंडिया की बड़ी चुनौती है। अगर टीम समय रहते इन कमियों को ठीक कर लेती है तो सुपर-8 में बेहतर प्रदर्शन संभव है।

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