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Supriya Sule ने संसद में दिल्ली वायु प्रदूषण पर बड़ा बयान दिया, कहा- शहर की हवा पीना मतलब 50 सिगरेट

Supriya Sule: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है और बुधवार को यह विषय संसद में भी गूंजा। लोकसभा में NCP (SP) की सांसद सुप्रिया सुले ने दिल्ली के वायु प्रदूषण के हालात का जिक्र करते हुए सदन में चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में घूमना ऐसा है जैसे एक दिन में 50 सिगरेट पीना, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन चुका है। सांसद ने इस मुद्दे पर सरकार से विशेष ध्यान देने और समाधान खोजने का आग्रह किया।

सुप्रिया सुले की चेतावनी और अपील

सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “दिल्ली में घूमने का मतलब एक दिन में 50 सिगरेट पीने जैसा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव जी से अनुरोध है कि सांसदों के साथ चर्चा कर योजना बनाएं और साफ तौर पर लक्ष्य तय करें कि वायु प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है।” उन्होंने यह टिप्पणी केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान की। सुप्रिया सुले ने जोर देकर कहा कि वायु प्रदूषण केवल दिल्ली का नहीं, बल्कि पूरे देश का गंभीर मुद्दा है, और इसके लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

दिल्ली में बुधवार का प्रदूषण स्तर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 335 दर्ज किया गया, जो कि “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। राजधानी में वायु प्रदूषण लगातार दूसरे दिन बेहद खराब स्थिति में रही। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे स्तर पर लोगों के लिए घर के बाहर गतिविधियां करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए जिनकी श्वसन प्रणाली कमजोर है। दिल्लीवासियों को सलाह दी गई है कि वे बाहर निकलते समय मास्क पहनें और अनावश्यक सड़कों पर यात्रा करने से बचें।

सरकार और सांसदों की भूमिका

सुप्रिया सुले ने सदन में सांसदों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने की अपील की, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक और प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्रोतों में ट्रैफिक, उद्योग, निर्माण कार्य और ठंडी हवा के कारण धुआं व धूल शामिल हैं। सांसदों और सरकार के सहयोग से नीतियों और नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया। इससे न केवल दिल्लीवासियों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य भी हासिल होंगे।

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