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सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर जारी किया नोटिस, समाज में विभाजन का खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने नए UGC (Promotion of Equality in Higher Educational Institutions) नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार, UGC और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस याचिका को पहले से दायर मूल याचिका के साथ टैग किया है। याचिका कंवर हरिवंश सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय क्षत्रिय महासभा और पूर्व सांसद ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि UGC के नए नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि जातीय भेदभाव केवल आरक्षित वर्गों तक सीमित नहीं होता, बल्कि किसी भी वर्ग में हो सकता है, इसलिए इसे केवल कुछ समुदायों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर लगाई रोक

ध्यान देने योग्य है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने UGC (Promotion of Equality in Higher Educational Institutions) Regulations, 2026 पर स्टे लगा दी थी। ये नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये नियम “प्रारंभ में ही अस्पष्ट” हैं और इनके “व्यापक प्रभाव” हो सकते हैं। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि ये नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। इन नियमों के विरोध में देशभर के शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों में विरोध प्रदर्शन हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर जारी किया नोटिस, समाज में विभाजन का खतरा

करणी सेना ने जयपुर में किया जोरदार विरोध

हाल ही में जयपुर में राजपूत करणी सेना ने UGC के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया और इन नियमों को वापस लेने की मांग की। करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि संगठन युवाओं के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगा। इस प्रदर्शन ने नियमों के खिलाफ देशव्यापी विरोध की आग और भड़का दी। विरोध प्रदर्शन कई हिस्सों में और शैक्षणिक संस्थानों में लगातार जारी हैं।

याचिकाओं में उठाए गए मुख्य मुद्दे

याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि नए नियम केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को ही परिभाषित करते हैं। विरोधियों का कहना है कि नियम ऐसा प्रतीत कराते हैं कि जातीय भेदभाव केवल इन वर्गों के खिलाफ होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को किसी भी संस्थागत सुरक्षा या शिकायत निवारण प्रणाली का लाभ नहीं मिलता। याचिकाकर्ताओं ने यह भी जोर दिया कि समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी वर्गों को समान संरक्षण मिलना चाहिए।

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