Stock Market: 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार कैसे रिएक्ट करेगा

Stock Market: शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। इस फैसले के बाद निवेशकों में अनिश्चितता पैदा हो गई है। खास बात यह है कि यह ऐलान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद आया, जिसमें कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया था। अब सवाल यह है कि भारत का शेयर बाजार इस नई स्थिति पर किस तरह प्रतिक्रिया देगा। 10 फीसदी टैरिफ के बाद भारत पर कुल टैरिफ 13 से 15 फीसदी के बीच था, जो अब बढ़कर 18 से 20 फीसदी तक जा सकता है। इस वजह से बाजार में गिरावट की संभावना भी जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप के बदलते नियम
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि ट्रंप ने इकोनॉमिक इमरजेंसी कानून के तहत टैरिफ लगाकर अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है। शुरुआत में इस फैसले को बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और GIFT Nifty में तेजी देखी गई। लेकिन कुछ ही घंटों में ट्रंप ने एक अलग कानूनी प्रावधान के तहत सभी पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसे बाद में 15 फीसदी कर दिया गया। यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रहेगा, उसके बाद जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस दौरान अन्य कानूनी रास्तों जैसे नेशनल सिक्योरिटी या ट्रेड प्रैक्टिस के आधार पर भी टैरिफ लगाए जा सकते हैं। निवेशकों के लिए असली चिंता टैरिफ की प्रतिशतता नहीं बल्कि अनिश्चितता और अप्रेडिक्टेबिलिटी है।

बाजार पर संभावित प्रभाव और निवेशकों की प्रतिक्रिया
कोटक महिंद्रा AMC के MD नीलेश शाह ने कहा कि बाजार पहले से ही इस स्थिति की प्राइसिंग कर रहा है। शेयर बाजार को उम्मीद है कि ट्रंप कानून के अलग-अलग नियमों का इस्तेमाल करके टैरिफ को स्थिर रखेंगे। शॉर्ट-टर्म में बाजार पर कुछ हलचल हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह ने कहा कि पिछले साल टैरिफ के तहत जमा हुए 175 बिलियन डॉलर और रिफंड क्लेम की संभावनाओं को देखते हुए अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा प्रेसिडेंशियल बयान और वैकल्पिक टैरिफ एक्शन से भी वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।
कौन से सेक्टर्स हो सकते हैं प्रभावित
भारत के लिए यह टाइमिंग महत्वपूर्ण है क्योंकि IT स्टॉक्स में कमजोरी और फेडरल रिजर्व पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता पहले से है। इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम ट्रेड समझौते ने भारतीय एक्सपोर्ट पर टैरिफ 18 फीसदी तक घटाया था। अब 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ की घोषणा के बाद निवेशक यह देखना चाहेंगे कि नया स्ट्रक्चर कैसे बाइलेटरल अंडरस्टैंडिंग के साथ इंटरैक्ट करता है। IT, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स में शॉर्ट-टर्म में रिएक्शन देखने को मिल सकता है। यदि बाजार को लगता है कि यह टैरिफ टेम्पररी है और मोटे तौर पर उम्मीदों के मुताबिक है, तो नुकसान नियंत्रित रह सकता है।
