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Bageshwar Maharaj के मंच से हुआ सनातन धर्म में परिवार का भावुक घर वापसी समारोह

Bageshwar Maharaj: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में एक विशेष धार्मिक आयोजन के दौरान आधे दर्जन से अधिक हिंदुओं ने पुनः सनातन धर्म की ओर वापसी की। यह आयोजन बागेश्वर महाराज के कथा मंच पर हुआ, जहां शिवदास, शिमला, कन्हाभगत, संजय भगत, कुंवर अक्षय सहित कई अन्य लोग जो ग्राम छोटी, पोस्ट तुगुड़ी के निवासी हैं, ने पुनः सनातन धर्म अपनाया। ये सभी लोग पहले 2006 में अपने बच्चे की दृष्टि सुधार की आशा में धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना चुके थे। लेकिन अब वे अपने मूल सनातन धर्म में लौट आए हैं। इस वापसी के अवसर पर सभी सदस्यों को बागेश्वर महाराज की व्यास पीठ के बगल में खड़ा कर त्रिकुंड चंदन लगाया गया, मंत्रों का जाप किया गया और उनके गले में बागेश्वर बालाजी की पट्टिका डाली गई।

धर्म परिवर्तन का कारण और पुनः वापसी का निर्णय

परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनके पुत्र संजय भगत का जन्म 2006 में हुआ था और तब उसे दृष्टि संबंधी समस्या थी। उस समय ईसाई धर्म के अनुयायियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि यदि वे उनके धर्म में शामिल हो जाएं, तो बच्चे की दृष्टि सुधर जाएगी। इस प्रलोभन में आकर परिवार ने धर्म परिवर्तन किया। परंतु बाद में उन्हें उस धर्म में संतोष नहीं मिला और बच्चे की दृष्टि भी सुधरी नहीं। परिवार ने कहा कि उस समय उन्हें जो आश्वासन दिया गया था, वह पूरा नहीं हुआ। इसीलिए वे अपनी गलती स्वीकार करते हुए अब पुनः अपने सनातन धर्म की ओर लौटे हैं।

बागेश्वर महाराज की अपील और धर्मांतरण के प्रति चेतावनी

बागेश्वर महाराज ने देश के उन हिंदुओं से खास अपील की है, जिनके पूर्वज रामलाल, श्यामलाल थे, कि वे भी सनातन धर्म की ओर पुनः लौटें। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण केवल एक छलावा है और इससे लोगों की असली पहचान खो जाती है। बागेश्वर महाराज की यह अपील सुनकर बहुत से लोग अपने धर्म के प्रति जागरूक हुए हैं। धर्म परिवर्तन की वजह से कई परिवारों को मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। इसलिए सनातन धर्म की ओर वापसी न केवल एक धार्मिक निर्णय है, बल्कि अपने संस्कारों और पहचान को पुनः पाने का भी रास्ता है।

परिवार का भावुक बयान और भविष्य की प्रतिबद्धता

धर्म परिवर्तन कर चुके परिवार ने कहा कि वे अपनी भूल मानते हैं और अब सनातन धर्म के प्रति पूरी निष्ठा के साथ प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से वे बागेश्वर महाराज की कथाएँ टेलीविजन के माध्यम से सुनते आ रहे थे, लेकिन आवश्यक सहयोग के अभाव में घर वापसी का कदम नहीं उठा पाए थे। आज इस आयोजन के माध्यम से उनकी घर वापसी संभव हुई, जिससे उन्हें अत्यंत खुशी मिली है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि वे भविष्य में कभी भी अन्य धर्म को नहीं अपनाएंगे और सदैव सनातन धर्म के प्रति समर्पित रहेंगे। यह घटना गोंदिया के लिए एक बड़ा धार्मिक और सामाजिक संदेश है, जो धर्म की महत्ता और उसकी सुरक्षा की ओर जागरूकता बढ़ाएगी।

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