Raghav Chadha का संसद में धमाका, कैसे मिलावट खाना बनाती है देश में स्वास्थ्य संकट

राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता Raghav Chadha ने संसद में खाद्य मिलावट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत में खाद्य मिलावट एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। उन्होंने कहा कि दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में कोस्टिक सोडा, मसालों में ईंट का पाउडर, शहद में पीला रंग, चिकन में स्टेरॉयड और आइसक्रीम में डिटर्जेंट मिलाया जा रहा है। इस तरह हम धीरे-धीरे जहरीला भोजन खा रहे हैं। राघव ने अपने ट्विटर हैंडल पर संसद में दिए गए भाषण का वीडियो भी शेयर किया।
संसद में Raghav Chadha के शब्द
Raghav Chadha ने कहा कि बाजार में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थ मिल रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि दूध में 71 प्रतिशत नमूने यूरिया और 64 प्रतिशत में सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे न्यूट्रलाइज़र पाए गए हैं। वहीं सब्जियों को ऑक्सीटोसिन देकर तेजी से बढ़ाया जाता है, जो मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि एक माँ जो अपने बच्चे को कैल्शियम और प्रोटीन देने के लिए दूध पिलाती है, वह अनजाने में अपने बच्चे को यूरिया या डिटर्जेंट मिला दूध दे रही होती है, जो बेहद खतरनाक है।

मिलावट से जुड़ी बड़ी संख्या में रोग और मौतें
राघव ने बताया कि 2014-15 से 2026 तक किए गए परीक्षणों में लगभग हर चौथे खाद्य पदार्थ में मिलावट पाई गई। इसके कारण कितने लोग बीमार हुए, अस्पताल गए या जान गंवाई, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में ऐसे उत्पाद बिक रहे हैं जो अन्य देशों में पशुओं को भी नहीं खिलाए जाते। विशेषकर भारत के दो बड़े मसाला उत्पादकों के उत्पाद जो कैंसरजनक कीटनाशकों के कारण अमेरिका और ब्रिटेन में प्रतिबंधित हैं, फिर भी भारत में बेचे जा रहे हैं।
FSSAI को सशक्त करें और सख्त कानून लागू हों
राघव ने सुझाव दिया कि खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को मजबूत किया जाना चाहिए। इसके लिए पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक लैब परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, खाद्य मिलावट पर जुर्माने को प्रभावी और बढ़ाया जाना चाहिए ताकि यह कंपनियों के लिए भारी पड़ सके। उन्होंने सार्वजनिक रीकॉल सिस्टम की भी मांग की, जिससे मिलावटी उत्पादों को बाज़ार से हटाया जा सके और उनके विज्ञापन पर रोक लगे। उन्होंने कहा कि यह कदम जनता को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए बेहद जरूरी हैं।
