IPL मैच बढ़ाने की योजना पर उठे सवाल टूर्नामेंट अवधि को लेकर आया नया अपडेट

इंडियन प्रीमियर लीग यानी Indian Premier League दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स में से एक बन चुका है। मार्च से मई के बीच होने वाला यह टूर्नामेंट क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़े उत्सव जैसा होता है जहां कई टीमों के बीच खिताब जीतने की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। पहले इस लीग में 8 टीमें हुआ करती थीं लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 10 हो चुकी है। बढ़ती टीमों के साथ मुकाबलों का रोमांच भी और अधिक बढ़ गया है। साथ ही टूर्नामेंट की लोकप्रियता और व्यावसायिक सफलता भी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है।
राजस्व और निवेश में तेजी से वृद्धि
Indian Premier League न केवल खेल के स्तर पर बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले वर्ष सभी टीमों ने मिलकर हजारों करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। हाल ही में कई फ्रेंचाइजी की वैल्यू भी काफी बढ़ी है जहां राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू जैसी टीमों की कीमत 15000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आईपीएल एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभर चुका है जो निवेशकों और कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मैचों की संख्या बढ़ाने पर क्या है स्थिति
आईपीएल में मैचों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी चर्चा समय समय पर होती रही है। फिलहाल एक सीजन में लगभग 74 मैच खेले जाते हैं और इसे बढ़ाकर 94 करने की संभावना पर विचार किया गया है। इस विषय पर Arun Singh Dhumal ने स्पष्ट किया कि ऐसा करने के लिए टूर्नामेंट की अवधि बढ़ानी होगी जो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शेड्यूल के कारण संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मार्च से मध्य मई तक ही आईपीएल के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध होता है क्योंकि इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और अन्य टूर्नामेंट्स का शेड्यूल शुरू हो जाता है।
टीम विस्तार और भविष्य की संभावनाएं
Arun Singh Dhumal के अनुसार आईपीएल में टीमों की संख्या बढ़ाने के लिए भी टूर्नामेंट की अवधि का विस्तार जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक आईपीएल के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध नहीं होगा तब तक नई टीमों को शामिल करना मुश्किल रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC के शेड्यूल पर भी इस विस्तार का काफी प्रभाव पड़ता है। फिलहाल आईपीएल का मौजूदा ढांचा काफी संतुलित है और इसे बदलने के लिए कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता होगी। भविष्य में यदि शेड्यूल और समय को लेकर सहमति बनती है तो टीमों और मैचों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
