MNS Leader Controversy: कल्याण में MNS नेता की दबंगई! गेमिंग ज़ोन कर्मचारी को मारा थप्पड़, इस बार मराठी नहीं बनी वजह

MNS Leader Controversy: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला भाषा से जुड़ा नहीं बल्कि बच्चों की स्कूल से गैरहाजिरी और गेमिंग ज़ोन में समय बिताने को लेकर है। ठाणे जिले के कल्याण में स्थित एक गेमिंग ज़ोन में एमएनएस जिलाध्यक्ष उल्हास भोइर ने एक कर्मचारी को सबके सामने थप्पड़ मार दिया। उल्हास का कहना था कि कुछ बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में गेमिंग ज़ोन में मौज-मस्ती करने आए थे, जो उनके अनुसार सही नहीं था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे एमएनएस की फिर से आलोचना शुरू हो गई है।
बच्चों पर चोरी का आरोप, कर्मचारी पर गुस्सा
उल्हास भोइर ने आरोप लगाया कि ये बच्चे स्कूल में पढ़ाई करने के बजाय अपने माता-पिता से चोरी से पैसे लेकर गेमिंग ज़ोन में आते हैं। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी बर्बाद हो रही है और इस पर रोक लगाना जरूरी है। जब उन्होंने एक कर्मचारी से इस बारे में सवाल किया तो कर्मचारी ने कहा, “मैं इसमें क्या कर सकता हूं?” इसी बात पर नाराज़ होकर उल्हास ने उस कर्मचारी को थप्पड़ जड़ दिया और चिल्लाने लगे, “इन बच्चों ने घर से 4000 रुपये चुराए हैं। इस पीढ़ी को बर्बाद मत करो।”
गेमिंग ज़ोन को दी चेतावनी, बच्चे की पढ़ाई का दिया हवाला
उल्हास ने गेमिंग ज़ोन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यह पहली और आख़िरी बार है, अगर ऐसा दोबारा हुआ तो पूरा ज़ोन गिरा दिया जाएगा। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा कि वह बच्चा कभी कक्षा 5 में 95 प्रतिशत अंक लाया करता था लेकिन अब केवल 60 प्रतिशत रह गए हैं। उनके अनुसार इसका कारण यह है कि बच्चे अब पढ़ाई से ज्यादा गेमिंग में व्यस्त हो गए हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों की स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं और उन्होंने ही इसकी शिकायत की थी।
माता-पिता की शिकायत पर की गई कार्रवाई
उल्हास भोइर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कार्रवाई किसी निजी गुस्से में नहीं की बल्कि बच्चों के माता-पिता की शिकायत पर की है। कुछ माता-पिता उनके पास आए और बताया कि उनके बच्चे स्कूल के बजाय गेमिंग ज़ोन जा रहे हैं और इसके लिए घर से चोरी कर पैसे ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की भलाई के लिए ऐसे स्थानों को जिम्मेदार होना चाहिए और स्कूल समय में यूनिफॉर्म में आने वाले बच्चों को प्रवेश नहीं देना चाहिए। हालांकि, इस तरह से कानून को हाथ में लेना कितना उचित है, इस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और एमएनएस की कार्यशैली पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।