मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार ने बढ़ाई LPG उत्पादन की तैयारी

मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो गई है। इसके मद्देनजर भारत सरकार ने आपात अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे घरेलू रसोई गैस की कमी न होने दें। सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पास उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम इस्तेमाल करके एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं। यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं को लगातार गैस उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।
भारत में LPG खपत और आयात की स्थिति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है। पिछले साल देश में करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन कुकिंग गैस की खपत हुई। LPG प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है और देश की कुल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। इसमें से करीब 85–90% सप्लाई मिडिल ईस्ट से आती है। जनवरी 2026 से अमेरिका से भी LPG आयात शुरू हो गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अमेरिकी खाड़ी तट से 2.2 मीट्रिक टन प्रति वर्ष एलपीजी आयात करने के लिए एक साल का अनुबंध किया है।

रिफाइनरियों को दिए गए उत्पादन और सप्लाई निर्देश
सरकार के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी तेल रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल LPG बनाने में करें। इसके साथ ही प्रोड्यूसर्स को निर्देशित किया गया है कि वे गैस को सरकारी रिफाइनरियों को उपलब्ध कराएं ताकि घरों तक सप्लाई लगातार जारी रहे। सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम मुख्य तौर पर गैस सप्लाई करेंगी। देश में लगभग 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया कि किसी भी राज्य या शहर में गैस की कमी न हो।
पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर पड़ सकता है असर
प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है। इनमें अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनकी कीमत LPG से अधिक है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां इन उत्पादों का निर्यात करती रही हैं। सरकार ने रिफाइनरियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में न लगाएं और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर LPG बनाने में इस्तेमाल करें। ट्रेड सूत्रों के मुताबिक इससे पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, लेकिन घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
