Meta का एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर बच्चों की सुरक्षा पर क्यों खतरा बना

Meta का एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर एक बार फिर सवालों के दायरों में आ गया है। फेसबुक मैसेंजर और इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेजिंग में यह फीचर चाइल्ड एब्यूज और आतंकवादी गतिविधियों जैसी गंभीर घटनाओं की रिपोर्टिंग को मुश्किल बना रहा है। मैक्सिको स्टेट कोर्ट में दायर दस्तावेज़ों के अनुसार, Meta के टॉप एग्जीक्यूटिव्स ने 2019 में इस फीचर को WhatsApp के अलावा अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर लागू करने से रोकने की गुजारिश मार्क जुकरबर्ग को ईमेल के जरिए की थी।
मोनिका बिकर्ट और मार्क जुकरबर्ग का विवाद
Meta के कंटेंट पॉलिसी हेड मोनिका बिकर्ट ने 2019 में जुकरबर्ग को चेतावनी दी थी कि फेसबुक मैसेंजर और इंस्टाग्राम DM में एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन लाने से कंपनी गैर-जिम्मेदाराना कदम उठा सकती है। मोनिका ने अपने ई-मेल में लिखा था, ‘हम एक कंपनी के तौर पर गलत काम करने जा रहे हैं।’ यह बातचीत अब मैक्सिको कोर्ट में दायर याचिका के जरिए सामने आई है। मोनिका का मानना था कि इस फीचर के कारण बच्चों की सुरक्षा और ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाएगा।

कानूनी चुनौतियां और वैश्विक आलोचना
मैक्सिको कोर्ट में 40 से ज्यादा अटॉर्नी जनरल ने Meta पर चाइल्ड प्रिडेशन के मामलों में फेल होने का आरोप लगाया है। अमेरिका के कई स्कूलों ने भी कंपनी के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं। एनक्रिप्शन के कारण बच्चों की सुरक्षा, मेंटल हेल्थ और ऑनलाइन सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। Meta के सीनियर सेफ्टी एग्जीक्यूटिव ने भी कहा कि इस फीचर के कारण आतंकवादी हमलों की योजना और चाइल्ड अब्यूज की घटनाओं को अंजाम देना आसान हो सकता है।
एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के फायदे और रिस्क
Meta ने 2023 में फेसबुक मैसेंजर और इंस्टाग्राम में WhatsApp जैसे एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर को रोल आउट किया। इसका उद्देश्य यूजर्स की बातचीत को सुरक्षित बनाना है, लेकिन चाइल्ड सेफ्टी एक्टिविस्ट इसे एक बड़ा जोखिम मानते हैं। Meta के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि यूजर्स किसी भी आपत्तिजनक संदेश को रिपोर्ट कर सकते हैं, और कंपनी ने यूजर्स की प्राइवेसी बनाए रखने के लिए यह फीचर लागू किया। इसके बावजूद, तकनीकी सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
