Maulana Madani ने कर्नाटक के हेट स्पीच रोकने वाले कानून को सराहा, बताया बड़ा कदम

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष Maulana Madani ने कर्नाटक विधानसभा द्वारा हेट स्पीच और नफरत पर आधारित अपराधों की रोकथाम के लिए कानून पास किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया भी बार-बार यह टिप्पणी कर चुका है कि देश में एक “नफरत का माहौल” बना हुआ है, जो समाज की शांति, भाईचारे और लोकतांत्रिक ढांचे को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में कर्नाटक सरकार का यह कदम सामाजिक सद्भाव और संविधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
जमीयत के प्रयासों की अहमियत
Maulana Madani ने बताया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद लंबे समय से नफरत फैलाने वाली गतिविधियों के विरुद्ध प्रभावी कानून बनाने की मांग करती आ रही है। इस संबंध में जमीयत ने अदालत के भीतर और बाहर कई स्तरों पर प्रयास किए हैं। नफरत के प्रसार को रोकने के लिए जमीयत ने एक अलग विभाग भी स्थापित किया है। उन्होंने याद दिलाया कि जमीयत की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को तेहसीन पूनावाला गाइडलाइंस के प्रभावी क्रियान्वयन का निर्देश दिया था।
कर्नाटक की पहल: आशा की किरण
मौलाना मदनी ने आगे कहा कि अप्रैल 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि घृणास्पद भाषण के विरुद्ध कार्रवाई करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसके लिए किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। दुर्भाग्यवश, अधिकतर राज्यों ने अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में कर्नाटक सरकार की यह पहल आशा की किरण है और अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकती है।
कानून का निष्पक्ष क्रियान्वयन और अन्य राज्यों से अपील
मौलाना मदनी ने जोर दिया कि नफरत और हिंसा के खिलाफ किसी भी कानून की सफलता केवल उसके अस्तित्व पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि इस कानून का गहराई से अध्ययन किया जाए और किसी भी अस्पष्टता को दूर किया जाए, ताकि भविष्य में इसका दुरुपयोग अल्पसंख्यकों या कमजोर वर्गों के खिलाफ न हो। साथ ही उन्होंने अन्य सभी राज्य सरकारों से अपील की कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कानून बनाएं, ताकि समाज में नफरत फैलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जा सके।
