विज्ञान

लो-फैट या फुल-फैट दूध: सेहत के लिए कौन सा बेहतर?

दूध को पोषण का पूरा स्रोत माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और कई जरूरी तत्व होते हैं जो हड्डियां मजबूत करने और इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। बाजार में दो मुख्य तरह के दूध मिलते हैं—लो-फैट और फुल-फैट। लेकिन सेहत के लिहाज से कौन सा दूध बेहतर है, यह आपके शरीर की ज़रूरत और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है।

फुल-फैट दूध प्राकृतिक दूध के सबसे करीब होता है। इसमें क्रीम नहीं निकाली जाती, इसलिए इसमें फैट की मात्रा अधिक होती है। यह मलाईदार और एनर्जी से भरपूर होता है। बच्चे, युवा, गर्भवती महिलाएं और वे लोग जो ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं, उनके लिए फुल-फैट दूध फायदेमंद होता है क्योंकि इससे उन्हें ज़रूरी कैलोरी और फैट-सॉल्युबल विटामिन मिलते हैं।

वहीं, लो-फैट दूध से ज्यादातर क्रीम हटा दी जाती है, जिससे इसका फैट कम होता है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम तो होते ही हैं, लेकिन कैलोरी कम होती है। इसलिए जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या जिनकी दिल की सेहत का खास ध्यान रखना होता है, उनके लिए लो-फैट दूध बेहतर विकल्प है।

बुजुर्गों और कम एक्टिव लाइफस्टाइल वाले लोगों को दूध का चुनाव करते समय अपनी सेहत और पोषण की ज़रूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। बहुत अधिक फुल-फैट दूध से वजन बढ़ सकता है जबकि जरूरत से ज्यादा लो-फैट दूध लेने से कमजोरी महसूस हो सकती है।

दूध का फायदा तभी होता है जब इसे संतुलित मात्रा में और ताज़ा पीया जाए। अगर किसी को लैक्टोज इनटॉलरेंस या पाचन संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है। इसलिए दूध चुनते समय सिर्फ फैट नहीं बल्कि अपनी पूरी सेहत और शरीर की आवश्यकताओं को समझना आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button