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Ladakh accident: सेना की गाड़ी पर चट्टान का कहर, अफसर समेत तीन शहीद, घायल जवानों का इलाज जारी

Ladakh accident: लद्दाख से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। दुर्बुक क्षेत्र में एक चट्टान भारतीय सेना के वाहन पर गिर गई, जिससे एक अधिकारी और दो सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस गंभीर हादसे में एक अधिकारी और दो अन्य सैनिक भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया। सेना के जवानों को तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया है।

सुबह 11:30 बजे हुआ हादसा, तेज बारिश बनी वजह

यह हादसा बुधवार सुबह लगभग 11:30 बजे हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खराब मौसम के कारण चट्टान वाहन पर गिर गई। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से तेज बारिश और बर्फबारी हो रही है, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और चट्टानें खिसकने की घटनाएं बढ़ गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, पहले यह खबर आई थी कि चार से पांच जवान, जिनमें एक अधिकारी भी शामिल हैं, घायल हुए हैं, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि तीन जवानों की जान चली गई है।

लद्दाख में भारतीय सेना की गाड़ी के ऊपर गिरी चट्टान, एक अधिकारी समेत 3 जवानों की मौत, 3 गंभीर रूप से घायल

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं, सेना कर रही लगातार राहत कार्य

लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम के चलते इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कुछ दिन पहले भी एक ऐसा ही हादसा हुआ था, जिसमें दो नागरिक घायल हुए थे। भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों लोगों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया था। सेना इन मुश्किल हालातों में भी लगातार जनसेवा और देश सेवा के लिए तैनात है, और हर आपात स्थिति में तत्परता से प्रतिक्रिया दे रही है।

20 जुलाई को अग्निवीर हरिओम नगर ने दी थी शहादत

इससे पहले 20 जुलाई को भी एक अग्निवीर ने लद्दाख में ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी थी। अग्निवीर हरिओम नगर की शहादत पर भारतीय सेना के लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और भारतीय सशस्त्र बलों के सभी जवानों ने अग्निवीर की बहादुरी को सलाम किया। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी अग्निवीर नगर की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और हम उनके परिजनों के साथ इस दुख की घड़ी में पूरी मजबूती से खड़े हैं। लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में तैनात जवान हर दिन प्रकृति की चुनौतियों का सामना करते हुए देश की सेवा कर रहे हैं।

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