IREF Budget Demands 2026: चावल निर्यातकों ने बजट 2026 में 4% ब्याज सब्सिडी और फ्रेट सहायता की मांग की

IREF Budget Demands 2026: भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) ने आगामी 2026-27 के केंद्रीय बजट में कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखीं हैं। इस क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ सतत विकास की चिंताओं को भी ध्यान में रखते हुए, IREF ने कर छूट, ब्याज सब्सिडी और मालभाड़ा सहायता देने की अपील की है। महासंघ ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें उन्होंने निर्यात क्रेडिट पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, सड़क और रेल मालभाड़े पर तीन प्रतिशत सहायता और ड्यूटी ड्रोबैक योजना के समय पर भुगतान की मांग की है।
निर्यातकों के लिए लागत घटाने का प्रयास
IREF के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि ये वित्तीय सहायता निर्यातकों के लिए लागत को सीधे कम करेगी और उन्हें उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि भारत विश्व के लगभग 40 प्रतिशत चावल व्यापार का हिस्सा है और वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 170 से अधिक देशों को लगभग 20.1 मिलियन टन चावल निर्यात किया है। चावल निर्यात किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और विदेशी बाजारों का एक महत्वपूर्ण आर्थिक स्तंभ है, जो भारत की आर्थिक ताकत और कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाता है।
क्षेत्र को चुनौतियों का सामना
प्रेम गर्ग ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट, उच्च खरीद और भंडारण लागत, और बाजार की अस्थिरता जैसी समस्याएं निर्यातकों के लिए बाधाएं हैं। उन्होंने कहा कि बजट में उचित वित्तीय और समर्थन उपायों के जरिए न केवल प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि सतत विकास और किसानों के हितों की भी रक्षा की जा सकती है। यह कदम कृषि क्षेत्र और निर्यात दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
ब्याज सब्सिडी और सहायता की मांग
IREF ने खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्यम (SME) चावल निर्यातकों के लिए निर्यात क्रेडिट पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने की जोरदार मांग की है। इससे निर्यातकों की वित्तीय लागत कम होगी, नकदी प्रवाह में सुधार होगा और वे अधिक प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य पर अपने उत्पादों को बाजार में ला पाएंगे। साथ ही, सड़क और रेल मालभाड़े पर सहायता से निर्यात के खर्चों में कमी आएगी, जिससे भारतीय चावल को विश्व बाजार में और मजबूती मिलेगी। ड्यूटी ड्रोबैक की समय पर भुगतान भी निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाएगा।
इस तरह, भारतीय चावल निर्यातकों की ये मांगें सरकार के बजट में शामिल होने पर न केवल क्षेत्र की विकास गति बढ़ेंगी बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत मिलेगी। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वे इस महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए उचित कदम उठाएंगे।