India-Israel FTA: जनवरी में होगी महत्वपूर्ण वार्ता, व्यापार और निवेश में बड़ा अवसर

India-Israel FTA: भारत और इज़राइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में इज़राइल के अधिकारियों की एक टीम भारत का दौरा कर प्रस्तावित एफटीए पर औपचारिक बातचीत शुरू करेगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत और इज़राइल ने पहले ही बिलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी (BIT) पर हस्ताक्षर कर लिया है, और अब FTA से दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह बढ़ाने और निवेश के नए अवसर खोलने में मदद मिलेगी।
दोनों देशों के बीच व्यापार का विस्तार
भारत और इज़राइल ने 20 नवंबर 2025 को FTA के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य अगले दस वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दस गुना बढ़ाना है। चीन के बाद, इज़राइल एशिया में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि, दोनों देशों के बीच वर्तमान में व्यापार मुख्य रूप से हीरे, पेट्रोलियम उत्पाद और रसायन तक सीमित है। हाल के वर्षों में इसका दायरा बढ़कर मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी, कृषि उत्पाद, रत्न और रत्न सामग्री, वस्त्र, धातु, प्लास्टिक आदि तक फैल गया है।
भारत-इज़राइल के व्यापारिक लेन-देन का स्वरूप
भारत से इज़राइल निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पादों में मोतियों और बहुमूल्य पत्थरों, रसायन और खनिज, कृषि उत्पाद, वस्त्र, आधार धातुएं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्लास्टिक शामिल हैं। वहीं, इज़राइल से भारत में आयातित उत्पादों में पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, मशीनरी और अन्य औद्योगिक सामान शामिल हैं। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार का आंकड़ा $3.62 बिलियन रहा, जिसमें भारत का निर्यात $2.14 बिलियन और आयात $1.48 बिलियन रहा।
भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) FTA पर भी चर्चा
इज़राइल के साथ FTA के साथ-साथ भारत ने रूस नेतृत्व वाले EAEU (यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन) के साथ द्विपक्षीय FTA पर भी बातचीत शुरू करने की योजना बनाई है। EAEU में रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाखस्तान और किर्गिज़स्तान शामिल हैं, जिनमें रूस भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत और EAEU के बीच प्रस्तावित FTA का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान $70 बिलियन से बढ़ाकर $100 बिलियन करना है। यह समझौता छोटे व्यवसायियों, किसानों और मछुआरों के लिए नए बाजार खोलने में भी मदद करेगा।
