भारत ने 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों के अपडेट के लिए एओएन दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 27 मार्च, 2026 को हुई बैठक में लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले प्रस्तावों को आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान की गई। इसमें भारतीय सेना और वायु सेना के लिए कई महत्वपूर्ण हथियार और सिस्टम शामिल हैं। यह कदम देश की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अहम माना जा रहा है।
भूमि बलों के लिए नई प्रणालियाँ
भारतीय सेना के लिए वायु रक्षा ट्रैक प्रणाली, आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक गोला-बारूद, उच्च क्षमता वाली रेडियो रिले, धनुष तोप प्रणाली और रनवे स्वतंत्र हवाई निगरानी प्रणाली को मंजूरी दी गई। वायु रक्षा ट्रैक प्रणाली वास्तविक समय में नियंत्रण और रिपोर्टिंग क्षमता प्रदान करेगी, जबकि उच्च क्षमता वाली रेडियो रिले विश्वसनीय और त्रुटिरहित संचार सुनिश्चित करेगी। धनुष तोप प्रणाली लंबी दूरी पर लक्ष्यों को भेदने की मारक क्षमता बढ़ाएगी।

वायु सेना के लिए S-400 और आधुनिक विमान
भारतीय वायु सेना के लिए मध्यम परिवहन विमान, S-400 लंबी दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक विमान और Su-30 एयरो इंजन एग्रीगेट्स के नवीनीकरण की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी मिली। S-400 प्रणाली दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई हमलों का मुकाबला करेगी। रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक विमान आक्रामक जवाबी और समन्वित अभियानों को अंजाम देने में सक्षम बनाएगा। Su-30 विमानों का नवीनीकरण उनकी सेवा अवधि बढ़ाएगा।
भारतीय तटरक्षक बल के लिए एयर कुशन वाहन
भारतीय तटरक्षक बल को हेवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स के लिए मंजूरी दी गई। इन वाहनों का उपयोग बहुउद्देशीय समुद्री तटीय परिचालन कार्यों के लिए किया जाएगा। इसमें उच्च गति तटीय गश्त, टोही, खोज एवं बचाव अभियान, जहाजों को सहायता प्रदान करना और कर्मियों व सामान का परिवहन शामिल है। यह कदम तटीय सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रियाओं को मजबूत करेगा।
अब तक के रिकॉर्ड और वित्तीय आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2025-26 में, डीएसी द्वारा 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्तावों के लिए एओएन स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा, चालू वित्तीय वर्ष में 2.28 लाख करोड़ रुपये के 503 प्रस्तावों के लिए पूंजीगत खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। स्वीकृत एओएन की मात्रा और हस्ताक्षरित अनुबंधों की संख्या किसी भी वित्तीय वर्ष में अब तक सबसे अधिक है।
