OTT ऐप्स का नियंत्रण बढ़ा! SIM Binding नियम के बाद Tech Experts ने चेतावनी दी, डिजिटल दुनिया में हलचल

SIM Binding: दूरसंचार विभाग (DoT) के हालिया निर्देश ने डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी है। इसके अनुसार, अब व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसी ऑनलाइन मैसेजिंग ऐप्स किसी भी डिवाइस पर तब तक नहीं चल पाएंगी जब तक उस पर सक्रिय SIM न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम OTT प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक नियंत्रण की शुरुआत हो सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों की चिंता
कई कानूनी विशेषज्ञ इसे DoT के अधिकार क्षेत्र से बाहर मान रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की वकील वृंदा भंडारी के अनुसार, यह फैसला सीधे मैसेजिंग ऐप्स को नियंत्रित करने जैसा है, जबकि इन ऐप्स पर पारंपरिक अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का है। अइश्वर्या कौशिक का कहना है कि मोबाइल नंबर आधारित किसी भी सेवा को DoT के साइबर सुरक्षा ढांचे में लाना बहुत बड़ा विस्तार है।

उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव और तकनीकी चुनौतियाँ
नए नियमों के अनुसार, यूजर्स को हर छह घंटे में ऐप में फिर से लॉगिन करना होगा और व्हाट्सऐप वेब जैसे प्लेटफॉर्म पर QR कोड बार-बार री-लिंक करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार SIM-बाइंडिंग से किसी भी डिजिटल धोखाधड़ी का दोष सीधे SIM धारक पर आ सकता है, जिससे कानूनी बोझ बढ़ेगा। तकनीकी रूप से भी इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण है और गलत कार्यान्वयन से असली उपयोगकर्ताओं को परेशानी हो सकती है।
टेलिकॉम कंपनियों का समर्थन, टेक कंपनियों की आपत्ति
टेलिकॉम कंपनियों ने इस आदेश का स्वागत किया है और इसे साइबर फ्रॉड रोकने के लिए विश्व में पहली बार लागू कदम बताया। वहीं, गूगल, मेटा जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि लागू करने का समय बढ़ाया जाए, सार्वजनिक परामर्श लिया जाए और टेक कंपनियों व सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर नया फ्रेमवर्क बनाया जाए।
