कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से अप्रैल में पेंट की कीमतों में 5 फीसदी तक वृद्धि संभव

Systematix Research की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें वर्तमान ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत में पेंट की कीमतें अप्रैल 2026 से 2 से 5 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। डीलरों का मानना है कि तेल की ऊंची कीमतों के चलते पेंट कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने का फैसला कर सकती हैं। हालांकि फिलहाल कोई पेंट कंपनी कीमत बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा नहीं कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां मार्च 2026 तक इंतजार कर सकती हैं ताकि कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और लागत पर असर का सही आंकलन किया जा सके।
लागत बढ़ने पर सीमित और धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं कीमतें
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो पेंट कंपनियों द्वारा अप्रैल 2026 में दामों में 2 से 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना है। कंपनियां इस बढ़ोतरी को शुरुआती तौर पर सीमित रख सकती हैं और इसे धीरे-धीरे लागू करेंगी। सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को दाम बढ़ाने में सावधानी बरतनी पड़ सकती है। यदि तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो पेंट के दामों में अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, लेकिन यह धीरे-धीरे ही किया जाएगा ताकि ग्राहकों पर ज्यादा असर न पड़े।

FY27 की पहली तिमाही में संभावित दाम वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, FY27 की पहली तिमाही में पेंट कंपनियों द्वारा कीमत बढ़ाने का पहला दौर देखा जा सकता है। शुरुआती बढ़ोतरी कम स्तर पर होगी, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो आगे और बढ़ोतरी की संभावना भी बनी रहेगी। रिपोर्ट के लंबे समय के विश्लेषण के अनुसार, अगर तेल की कीमत तिमाही आधार पर करीब 10 फीसदी बढ़ती हैं, तो कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में औसतन लगभग 130 बेसिस प्वाइंट की गिरावट देखी जा सकती है। इस तरह का असर कंपनियों की लागत संरचना और मुनाफे पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगा।
पेंट इंडस्ट्री में मांग बनी हुई है मजबूत
हालांकि कीमतों में संभावित वृद्धि के बावजूद पेंट इंडस्ट्री में मांग फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों के डीलरों के अनुसार कुल मांग में करीब 46 फीसदी की वैल्यू ग्रोथ देखी जा रही है। खासकर सस्ते सेगमेंट के पेंट, जैसे इकॉनमी इमल्शन और डिस्टेंपर की बिक्री प्रीमियम और लग्जरी पेंट प्रोडक्ट्स की तुलना में तेज़ी से बढ़ रही है। यह दर्शाता है कि चाहे कीमतों में बढ़ोतरी हो, ग्राहकों की मांग मजबूत बनी रहेगी और कंपनियों के लिए यह स्थिर राजस्व का संकेत भी है।
