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अप्रत्यक्ष कर संग्रह में सरकार ने कैसे हासिल किया लक्ष्य से ज्यादा राजस्व जानिए पूरा गणित

वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने अप्रत्यक्ष कर संग्रह के मामले में अपने संशोधित अनुमान को थोड़ा सा पार कर लिया है। एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार यह प्रदर्शन आर्थिक गतिविधियों में सुधार और कर अनुपालन बढ़ने का संकेत देता है। संशोधित अनुमान के तहत कुल अप्रत्यक्ष कर संग्रह ₹15.52 लाख करोड़ से अधिक रहने की उम्मीद थी। इसमें कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर यानी Central Goods and Services Tax शामिल थे। सरकार का यह प्रदर्शन बताता है कि टैक्स सिस्टम में स्थिरता और डिजिटल ट्रैकिंग के कारण राजस्व संग्रह बेहतर हुआ है।

कस्टम एक्साइज और GST से बेहतर प्रदर्शन

वास्तविक आंकड़ों के अनुसार विभिन्न कर श्रेणियों में प्रदर्शन संतोषजनक रहा। कस्टम ड्यूटी संग्रह संशोधित अनुमान का लगभग 102 प्रतिशत रहा जबकि एक्साइज ड्यूटी 101 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं Central Goods and Services Tax यानी CGST का संग्रह भी 100.8 प्रतिशत रहा। कुल मिलाकर GST और नॉन GST दोनों प्रकार के अप्रत्यक्ष करों का संयुक्त संग्रह 101.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि आयात गतिविधियों में मजबूती और घरेलू खपत में सुधार ने राजस्व बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कर संग्रह के ये आंकड़े सरकार के वित्तीय प्रबंधन की मजबूती को भी दर्शाते हैं।

अप्रत्यक्ष कर संग्रह में सरकार ने कैसे हासिल किया लक्ष्य से ज्यादा राजस्व जानिए पूरा गणित

स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस में कमी

जहां एक ओर कुल अप्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य से ऊपर रहा वहीं स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस के मामले में प्रदर्शन कमजोर रहा। इस सेस से ₹2,330 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तविक संग्रह केवल 63 प्रतिशत ही हो सका। यह सेस मुख्य रूप से पान मसाला बनाने वाली इकाइयों पर उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर लगाया जाता है और इसे 1 फरवरी 2026 से लागू किया गया था। यह सेस 40 प्रतिशत की उच्चतम GST दर के अतिरिक्त लगाया जाता है। कम संग्रह के पीछे शुरुआती कार्यान्वयन चुनौतियां और नई व्यवस्था का स्थिर न होना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

इनडायरेक्ट टैक्स का अर्थ और भविष्य की उम्मीदें

अप्रत्यक्ष कर वह टैक्स होता है जो वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर लगाया जाता है और जिसका भुगतान उपभोक्ता करते हैं। इसे सीधे आय पर नहीं लगाया जाता बल्कि वस्तु या सेवा की कीमत में शामिल किया जाता है और विक्रेता इसे सरकार को जमा करता है। उदाहरण के तौर पर Goods and Services Tax एक प्रमुख अप्रत्यक्ष कर है। इस प्रकार के कर में टैक्स का भार उपभोक्ता वहन करता है जबकि भुगतान का माध्यम विक्रेता होता है। सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस के संग्रह में सुधार होगा क्योंकि नई व्यवस्था धीरे धीरे स्थिर हो रही है और इसका लक्ष्य ₹14,000 करोड़ रखा गया है।

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