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आपातकालीन निधि कैसे तय करें ताकि अचानक पैसों की जरूरत कभी मुश्किल न बने

चाहे आप नौकरीपेशा हों या व्यवसाय में, कभी भी अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है। निवेश की आदतें ऐसी परिस्थितियों में मदद करती हैं, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति को अपनी जरूरत के अनुसार आपातकालीन निधि बनानी चाहिए। क्योंकि नौकरी जाने या व्यापार में उतार-चढ़ाव का जोखिम हमेशा बना रहता है। जब आय रुकती है लेकिन खर्च चलते रहते हैं, तब यह निधि एक भरोसेमंद साथी साबित होती है।

निधि बनाने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

आपातकालीन निधि की राशि हर किसी के लिए समान नहीं होती। यह आपकी आय, नौकरी या व्यवसाय की स्थिरता और परिवार पर आपकी जिम्मेदारियों पर निर्भर करती है। बहुत छोटी निधि मुश्किल समय में पर्याप्त मदद नहीं कर पाती। इसलिए निधि बनाते समय इन पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। अपने खर्च, कर्ज और परिवार के सदस्यों को ध्यान में रखते हुए सही राशि तय करें।

आपातकालीन निधि कैसे तय करें ताकि अचानक पैसों की जरूरत कभी मुश्किल न बने

3 और 6 महीने की आपातकालीन निधि

जो व्यक्ति अविवाहित हैं और जिन पर कोई बड़ा कर्ज या ईएमआई का बोझ नहीं है, उनके लिए 3 महीने के खर्च के बराबर आपातकालीन निधि पर्याप्त रहती है। यह निधि उनकी अधिकांश आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकती है। वहीं, जो लोग परिवार के साथ रहते हैं, उनके लिए अधिक सुरक्षा जरूरी है। ऐसे लोगों को लगभग 6 महीने के खर्च के बराबर निधि बनाने की सलाह दी जाती है, जिसमें किराया, ईएमआई, राशन, यूटिलिटी बिल, स्कूल फीस, बीमा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें शामिल हों।

12 महीने की आपातकालीन निधि और व्यापारियों के लिए महत्व

यदि आप नौकरीपेशा नहीं हैं और आपका व्यवसाय स्थिर नहीं है, तो कम से कम 9 से 12 महीने की आपातकालीन निधि बनाना चाहिए। क्योंकि पूरी परिवार की निर्भरता आप पर है और आय निश्चित नहीं है, ऐसे में बिना आपातकालीन निधि के मुश्किल समय में गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। यह निधि आपको आत्मनिर्भर बनाए रखती है और अप्रत्याशित परिस्थितियों में सुरक्षा प्रदान करती है।

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